महराजगंज। सपनों को उड़ान देने के लिए हौसले मजबूत हों तो बंदिशें रास्ता नहीं रोक सकतीं। आनंदनगर की शिखा पाठक ने इसे अपनी उपलब्धियों से साबित किया है। मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंची शिखा चीन के चेंगदू में आयोजित 12वें विश्व खेलों में जू-जित्सु की रेफरी के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
इस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए दुनिया भर से चुने गए आठ शीर्ष रेफरियों में वह शामिल थीं। भारत की एकमात्र प्रतिनिधि होने के साथ वह एशिया की पहली महिला अंतरराष्ट्रीय तकनीकी अधिकारी भी बनी। 11 अक्तूबर से शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पखवाड़े की थीम बेटियों की सुरक्षा और नेतृत्व क्षमता का विकास है। ऐसे में शिखा की उपलब्धि खास मायने रखती है। नवरात्र में मां चंद्रघंटा के शांति, संयम और आंतरिक शक्ति के संदेश की तरह उनकी यात्रा भी दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास की मिसाल है।
गोरखपुर से शुरू हुआ सफर, राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान फरेंदा तहसील के आनंदनगर स्थित निरालानगर वार्ड की रहने वाली शिखा ने खेल की शुरुआत जूडो से की। वर्ष 2005 में वह गोरखपुर से राष्ट्रीय जूडो पदक हासिल करने वाली पहली खिलाड़ी बनीं। इसके बाद उन्होंने लक्ष्मीबाई नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ फिजिकल एजुकेशन, ग्वालियर से 2012 में स्नातक और 2014 में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की। कॅरिअर की शुरुआत पीजीटी शारीरिक शिक्षा शिक्षक के रूप में की। वर्ष 2016 में सहायक प्रोफेसर बनीं। शिक्षण की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने लड़कियों को खेल प्रशिक्षण देना शुरू किया। उनके मार्गदर्शन में कई छात्राओं ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल किए।
बेटियों को नेतृत्व के लिए कर रहीं प्रेरित : शिखा का कहना है कि बेटियां केवल चौका-चूल्हा संभालने तक सीमित नहीं हैं बल्कि हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और दक्षता साबित कर सकती हैं।
मध्यमवर्गीय परिवार में शुरुआती बंदिशों का सामना करने के बावजूद उन्होंने माता-पिता को समझाया और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं। आज उनकी उपलब्धियां जिले की बेटियों के लिए प्रेरणा हैं।