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विसरा रिपोर्ट आने में देरी से फाइलों में ही दफन है मौत के राज

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विसरा रिपोर्ट आने में देरी से फाइलों में ही दफन है मौत के राज
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मौत के कारणों को जानने में हो रही देर, कई मामलाें में जांच की रिपोर्ट का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में संदिग्ध मौतों की गुत्थी सुलझाने में पुलिस को पसीना बहाना पड़ रहा है। विसरा रिपोर्ट समय से नहीं आती है। लंबे समय से रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। जिले में विभिन्न थानों से भेजे जाने वाले विसरा की रिपोर्ट कब आएगी, कोई गारंटी नहीं है।
जब भी पोस्टमार्टम के बाद भी मौत की वजह पता नहीं चलती तो विसरा की जांच की जाती है। अगर गाड़ी से कुचल कर किसी की मौत हो जाए या किसी की गोली मारकर हत्या कर दी जाए तो शव का पोस्टमॉर्टम होता है। ऐसे मामले में आमतौर पर विसरा जांच की जरूरत नहीं होती। पर शव देखने के बाद अगर मौत की कुछ खास वजहों की आशंका होने पर विसरा की जांच की जाती है। खासकर मौत की वजह जहर होने की आशंका होने पर ऐसा किया जाता है।
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निचलौल थाने से वर्ष 2020 तीन बिसरा जांच के लिए भेजी गई। अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। इन तीनों मामलों में अज्ञात मिले शव मिले थे। वहीं कोठीभार थाने से एक विसरा जांच के लिए भेजा गया था। 30 नवंबर 2020 को ग्राम पकड़ी चौबे में बच्चों के विवाद में बड़ों के साथ मारपीट में महिला सैरुन निशा की मौत हो गई थी। उनका विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा गया था। अभी उसकी रिपोर्ट नहीं आई है।
फरेंदा थाने में दस बिसरा सुरक्षित रखे गए थे। उनमें से तीन की रिपोर्ट मुकदमे से संबंधित भेज दी गई है। पुरंदरपुर थाने से पांच बिसरा जांच के लिए भेजे गए। एक रिपोर्ट आई है, वह भी नील है। बोकवा के इसरत अली की मौत हो गई। परिवार के लोगों का आरोप था कि वह मारपीट में घायल हो गए थे। बाद में मौत हो गई। उनके विसरा की रिपोर्ट नहीं आई है।
बृजमनगंज थाने से दो विसरा जांच के लिए भेजे गए थे। रिपोर्ट नहीं आई है। कवलपुर निवासी राजकुमार का शव मिला था। बिसरा जांच के लिए भेजा गया। रिपोर्ट का इंतजार है।
थाना नौतनवां में बीते एक वर्ष में छह में से चार का विसरा जांच के लिए भेजा गया। इनमें से अब तक किसी की जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। नौतनवां कस्बे के आंबेडकर नगर निवासी मदन लाल श्रीवास्तव (28) की 22 अप्रैल 2020 को घर में ही फांसी पर लटका हुआ शव मिला था। बिसरा 22 जुलाई 2020 को जांच के लिए भेजा गया था। बरवां खुर्द निवासी राकेश (28) की चार जुलाई 2020 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। तीन नवंबर को विसरा जांच के लिए भेजा गया था। किसी की रिपोर्ट नहीं आई है।
लैब की कमी और बड़ी संख्या में सैंपल होने के कारण रिपोर्ट आने में ज्यादा वक्त लग जाता है। विसरा रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि मौत जहर से हुई है, या नहीं। विसरा प्रिजर्व करने के दौरान डेड बॉडी से लीवर, स्प्लीन और किडनी का पार्ट रखा जाता है। साथ ही शरीर में मौजूद फ्लूड आदि को प्रिजर्व किया जाता है।
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- प्रदीप गुप्ता, एसपी
सीआरपीसी की धारा-293 के तहत एक्सपर्ट व्यू एडमिशिबल एविडेंस होता है, यानी विसरा रिपोर्ट एक्सपर्ट व्यू होती है और यह मान्य साक्ष्य है। बचाव पक्ष चाहे तो विसरा रिपोर्ट तैयार करने वाले एक्सपर्ट को कोर्ट में पेश होने के लिए अर्जी दे सकता है और कोर्ट की ओर से बुलाने के बाद उनके साथ जिरह कर सकता है।
- संतोष श्रीवास्तव, अधिवक्ता, दीवानी कचहरी
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