एक करोड़ हर महीने है गरीबों के मुफ्त चावल का धंधा
बाजारों में आसानी से बिक जाता है मोटा चावल, डोसा बनाने में किया जाता है प्रयोग, 20 से 22 रुपये प्रति किलो की दर से मिल जाता है चावल
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। गरीबों को मुफ्त मिलने वाले राशन का धंधा करीब हर माह एक करोड़ का है। बाजारों में आसानी से पहुंच जा रहे मोटे चावल को बेचकर मोटी आमदनी की जा रही है। इसमें एक लंबी शृंखसा जुड़ी हुई है। कबाड़ी से लेकर दुकानदार तक इसमें शामिल हैं। मंडी तक चावल आसानी से पहुंच जाता है। इसे जानकर भी अधिकारी अनजान बने हैं।
गरीबों को मुफ्त में मिलने वाले राशन के खेल की पड़ताल में हकीकत परत-दर-परत सामने आ गई। शहर में मऊपाकड़ मंडी में मोटा चावल दिखा। मंडी तक यह चावल आसानी से पहुंच जाता है। फेरीवालों के अलावा लाभार्थी भी खुद पहुंचा देते हैं। यहां से मिलने वाली रकम से महीन चावल या जरूरत की सामग्री खरीद कर चले जाते हैं। करीब एक करोड़ का कारोबार मोटे चावल का हो रहा है।
होटलों में डोसा बनाने के काम यह चावल आता है। रेस्टोरेंट संचालक मंडी में मोलभाव कर चावल खरीद लेते हैं। इससे उनका काम भी बन जाता है और रकम भी कम खर्च करनी पड़ती है। मंडी में मोटा चावल 20 से 22 रुपये के भाव से मिल जाता है। समय के हिसाब से रेट भी बढ़ता रहता है।
पड़ताल के दौरान दुकानदार ने पूरी कहानी बयां कर दी। दुकानदार के अनुसार, लाभार्थियों को जब चावल कोटे की दुकान से मिलता है तो वह इसे खाना नहीं चाहते हैं। मोटा चावल बगैर दाल के खाया नहीं जाता है। इससे वे मंडी में बेचकर रकम लेते हैं। कुछ तो ऐसे बेचने आते हैं, निनको चावल की जरूरत ही नहीं होती है।
ऐसे में करीब 20 लोग प्रतिमाह मंडी में चावल बेचने आते हैं। राशन कार्ड कोटेदार को दिखाने के बाद अंगूठा लगाकर चावल लेकर मंडी में बेच देते हैं। दुकान आए एक व्यक्ति ने माथे से छोटी सी बोरी उतारते हुए बोला की भाई जरूरी है तो बेचना ही पड़ेगा। उससे नाम पूछा गया तो कहा कि नाम पूछकर क्या करेंगे। हमारे घर पर भोजन पहुंचाएंगे क्या? नाराजगी प्रकट करते हुए दुकानदार के पास पहुंचा और चावल बेचकर 150 रुपये लिया। मिली हुई रकम से दाल और तेल दुकान से खरीद कर चला गया।
शहर की मंडी में आगे बढ़ने पर हनुमानगढ़ी के पास एक दुकान मिली। यहां भी मोटे चावल की भरमार दिखी। गरीबों को मिलने वाले मुफ्त चावल खरीदार कई लोग दिखे। पास में खड़े दो लोग आपस में बातें कर रहे थे।
लोगों ने कहा कि यहां तो सस्ते में चावल मिल जाता है। रेस्टोरेंट संचालक भी चावल खरीदते हुए दिखे। उन्होंने बताया कि डोसा बनाने में चावल का उपयोग किया जाता है। मोटा चावल सस्ता होने के साथ ही पौष्टिक भी होता है। ग्राहक काफी पसंद करते हैं।
प्रति किलो कम से चार से पांच रुपये होता है मुनाफा
मोटा चावल बेचने में दुकानदार को चार से पांच रुपये प्रति किलो का फायदा होता है। इस हिसाब से हर माह करीब एक करोड़ का कारोबार हो रहा है। ऐसा नहीं यह खेल कोई नया है। यह लंबे समय चल रहा है। कोटे का राशन मंडी में पहले भी बिक जाता था। मुफ्त में मिले चावल को बेचकर जरूरतमंद महीन चावल खरीदते हैं।
जिले में पात्र गृहस्थी राशनकार्ड 4,34,151, अंत्योदय राशनकार्ड 66,619 बने हैं। कुल राशनकार्ड 5,00,770 है। इसमें आधे से अधिक अपने राशन का उपयोग नहीं करते हैं। कुछ उसे बेचकर महीन चावल लेते हैं तो कुछ रकम बना लेते हैं।
ज्यादा मोलभाव मत करिए, लेना हो तो लीजिए
हनुमानगढ़ी के पास एक दुकान पर फेरीवाले ने रुकते हुए पूछा, चावल लेना है। दुकानदार ने पूछा से कहां से आया है। फेरीवाले ने कहा कि जल्दी लेना हो तो लीजिए, नहीं तो सस्ते में बहुत खरीदार मिलेंगे। 40 रुपये किलो है। दुकानदार बोला, भाई ज्यादा नखरे मत कर, यह चावल कौन पूछेगा। मजदूर ले जाएंगे या डोसा बनाने के लिए खरीदा जाएगा। दुकानदार ने रेट तय कर पूरा चावल खरीद लिया।
कोट
गरीबों को मुफ्त में राशन समय से मिलता है। बाजार में बिक्री होने की जानकारी नहीं है। नियम के अनुसार कार्डधारक को अंगूठा लगाने पर ही राशन दिया जाता है। अगर कहीं गड़बड़ी हो रही है तो जांच कराई जाएगी।
-एपी सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी