घुघली। नगर पंचायत के कान्हा पशु आश्रय गृह में पशुओं की क्षमता 20 की है, लेकिन इस समय पल रहे हैं। 26 पशु क्षमता से अधिक पशु होने व सुखा भूसा खाने से स्थिति लचर हो गई है। यहां हरे चारे की कोई व्यवस्था नहीं है। न ही दुर्गंध को दूर करने का कोई इंतजाम किया गया है।
हालत यह है कि नालियों से उठने वाले दुर्गंध से संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है, पशुओं को ठंड के महीने में बचाव के लिए भी कुछ मुकम्मल इंतजाम नहीं किया गया है। बावजूद कोई भी जिम्मेदार गंभीर नहीं है।
शनिवार को जब नगर के कान्हा पशु आश्रय गृह की हकीकत पड़ताल किया तो देखा कि 26 पशु केवल सुखा भूसा के सहारे अपना पेट भर रहे हैं। बदबूदार नालियां तथा पशुओं के पास ही गोबर रखने की व्यवस्था आश्रय की व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया है। पशु आश्रय में काम कर रही महिला कर्मचारी ने कहा की पशुओं के खाने की सभी वस्तु मौजूद है। पूछने पर कि क्यों केवल सुखा भूसा ही पशुओं को दिया जा रहा है, तो उन्होंने कुछ बताने से इंकार कर दिया।
पशुओं के पास रखा गोबर से संक्रामक रोग फैलने की आशंका बनी रहती है। आश्रय में पहुंचने पर नाक पर रूमाल लगाकर ही वहा कुछ देर ठहर सकते हैं। आश्रय में जो पशु आज खाने के लिए बांध दिए गए वह एक महीने तक वहीं बंधे रहते हैं।
इसलिए कि जगह का अभाव है। क्योंकि क्षमता से ज्यादा पशुओं को रखा गया है। क्योंकि, उक्त आश्रय में 16 से 18 पशु ही रह सकते हैं, लेकिन 26 पशुओं को रखा गया है।
कान्हा पशु आश्रय में पशुओं के खाने पीने की सारी व्यवस्था है। यदि किसी प्रकार की कमी होगी तो उसको दूर किया जाएगा। समय समय पर उसकी निगरानी रखनी पड़ती है। आश्रय की क्षमता बढ़ाने के लिए उच्चाधिकारियों से वार्ता की जा रही है।
-संतोष कुमार जायसवाल, नगर अध्यक्ष