जिंदगी 1200 रुपये से भी सस्ती?
- फोटो : अमर उजाला
महराजगंज। क्या आपकी जिंदगी 1200 रुपये से भी सस्ती है। नहीं, तो फिर क्यों नहीं हेलमेट लगाकर चलते हैं। हेलमेट नहीं लगाने से जिले में एक महीने में 24 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। हेलमेट की अहमियत उनसे पूछिए जो हादसे में इसी की वजह से अपनों के बीच आज मौजूद हैं। इसी तरह का अनुभव है मधुकरपुर निवासी दामोदर का। वह चार मई की शाम को छह बजे गोरखपुर-सोनौली मार्ग पर अपनी बाइक से किसी जरूरी काम से जा रहे थे। पिपरा मौनी चौराहे के पास उनकी बाइक एक अज्ञात वाहन की चपेट में आ गई। बुरी तरह घायल दामोदर को अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब उनकी हालत ठीक है। डॉक्टरों का कहना था कि अगर उन्होंने हेलमेट न पहना होता तो अनहोनी हो सकती थी।
लोगों को यातायात नियमों को बताने और सड़क पर सुरक्षा के लिए शासन-प्रशासन तमाम उपाय करता है। पिछले दिनों सड़क सुरक्षा सप्ताह भी मनाया गया, लेकिन कोई असर नहीं दिख रहा है। सड़क हादसों में जान गंवाने वाले हेलमेट के बगैर बाइक चला रहे थे और सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौत हो गई। इसके बाद भी तमाम लोग तीन सवारी बैठाकर बगैर हेलमेट सड़कों पर धड़ल्ले से घूम रहे हैं।शनिवार को तो इक्का दुक्का लोग ही हेलमेट लगाकर बाइक चलाते हुए दिखे। यही नहीं, एक बाइक पर तीन सवारी तो आम बात रही। कई लोग तीन सवारी बैठाकर बाइक चलाते हुए दिखे। वह भी हेलमेट के बगैर। तमाम लोग बाइक चलाने के दौरान मोबाइल पर बात करते हुए भी दिखे। लापरवाही का यह आलम देख ऐसा लगा जैसे यातायात जागरूकता अभियान का जरा भी असर न पड़ा हो। नगर क्षेत्र के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी कमोवेश यही स्थिति दिखी। सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या पर नजर डाले तो अप्रैल माह में करीब 24 लोगों की दुर्घटना में जान गई। इसमें से जिन 17 लोगों की जान हेलमेट न लगाने के कारण सिर में गंभीर चोट लगने से गई, अगर वह हेमलेट लगाए होते तो शायद उनकी जान बच सकती थी। 17 ऐसे हैं जो हेलमेट न लगाने से मौत की नींद सो गए। लोगों की माने तो बाइक सवार हेलमेट पहने होते तो उनकी जान नहीं जाती। इन हादसों में मृतकों के परिजनों को जो जख्म मिला, वह कभी भूल नहीं पाएंगे।