अंतरराष्ट्रीय सीमा सोनौली से गिरफ्तार विदेशी नागरिक जार्डन ब्राउन को स्थानीय कारागार प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जिला कारागार गोरखपुर शिफ्ट कर दिया है। कोर्ट में जार्डन के मामले की अगली सुनवाई छह अगस्त को होनी है।
जानकारी के अनुसार, 11 जुलाई को अवैध तरीके से नेपाल जाने की कोशिश कर रहे एक विदेशी नागरिक को एसएसबी ने ग्रामीणों के सहयोग से स्तंभ संख्या 516 (22) जायसवाल मोहल्ले से पकड़ा था। आरोपी के पास न तो पासपोर्ट और वीजा भी नहीं था। यही नहीं पकड़े जाने के बाद इसने दो मोबाइल फोन तोड़कर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश की।
आरोपी के खिलाफ सोनौली कोतवाली में दर्ज आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम 2025 में प्राथमिकी दर्ज की गई। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अलग अलग बयान देकर आरोपी ने पहचान छिपाने की कोशिश की। पुलिस ने इसे अपर जिला सत्र न्यायाधीश देवेंद्र प्रताप सिंह की अदालत में प्रस्तुत किया था जहां से उसे कारागार में निरुद्ध करने आदेश दिया गया।
जिला कारागार में निरुद्ध रहने के दौरान इसे एक बार पुलिस रिमांड लेकर पूछताछ कर चुकी है। इसके बाद इस पर अदालत में धोखाधड़ी की धाराओं को बढ़ाने की जानकारी दी गई। अब जार्डन ब्राउन को गोरखपुर कारागार में शिफ्ट किया गया है।
ऐसा करने के पीछे प्रशासन व जांच एजेंसियों की मंशा क्या है यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन यह निश्चित है कि जांच की रणनीति के तहत ऐसा किया गया है क्योंकि मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसियों की इंट्री के संकेत मिले हैं।
दो बार वीसी से की गई कोर्ट में पेशी
जार्डन को महराजगंज कारागार में निरुद्ध किए जाने के बाद अब तक उसे तीन बार अपर सत्र न्यायाधीश देवेंद्र प्रताप सिंह की अदालत में प्रस्तुत किया जा चुका है। एक बार जहां उसे पुलिस अभिरक्षा में कोर्ट ले जाया गया था वहीं दो बार उसकी पेशी कारागार से वीसी के जरिये कराई गई।
मामले की अगली सुनवाई छह अगस्त को होनी है। अब देखने वाली बात यह है कि गोरखपुर कारागार प्रशासन उसे पुलिस अभिरक्षा में न्यायालय लाता है या महराजगंज की तरह वीसी से प्रस्तुत करता है।
सुरक्षा कारणों से जार्डन को बुधवार को गोरखपुर जिला कारागार में शिफ्ट किया गया है। निरुद्ध बंदियों के लिए यह प्रक्रिया सामान्य है इसमें किसी एजेंसी का या प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं है: वीके गौतम, अधीक्षक जिला कारागार महराजगंज।