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Maharajganj News: थायराइड नियंत्रित नहीं तो गर्भावस्था में बढ़ेगी परेशानी

Mon, 15 Apr 2024 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज। महिला अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में थायराइड की समस्या से पीड़ित अधिक महिलाएं आ रही हैं, इसमें युवतियां भी शामिल हैं। डॉक्टर के अनुसार गर्भावस्था के पहले ही थायराइड नियंत्रित होना जरूरी है। थायराइड नियंत्रित किए बिना गर्भ धारण के बाद भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। इसके कारण गर्भस्थ शिशु का विकास भी अवरुद्ध हो सकता है। वर्तमान में 12 से 15 साल की बच्चियों में भी थायराइड की समस्या पाई जा रही है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योत्सना ओझा बताती हैं कि प्रतिदिन 4 से 5 गर्भवती महिलाओं की जांच में थायराइड पाया जाता है। ऐसी महिलाओं को थायराइड हार्मोन की टेबलेट देते हैं, जिससे थायराइड कंट्रोल हो सके। इसके दुष्प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर देखने को मिलते हैं। किसी-किसी केस में थायराइड कंट्रोल न होने पर समस्या हो जाती है। थायराइड भी दो प्रकार को होता है। पहला हाइपोथायरायडिज्म, जिसे मोटापा वाला थायराइड कहते हैं। यह थायराइड बिगड़ सकता है माहवारी चक्र यदि किसी युवती को थायराइड की परेशानी है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। थायराइड के कारण अनियमित माहवारी तो कभी कम माहवारी की शिकायत देखने को मिलती है। ज्यादातर महिलाओं में देखने को मिल रहा है। दूसरा है हाइपरथायरायडिज्म, जिसे सूखा थायराइड कहते हैं। यह बहुत कम महिलाओं में देखने को मिलता है। इसका इलाज भी फिजिशियन करते हैं।
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गर्भावस्था में थायराइड
गर्भावस्था के शुरुआती 3 माह में 2.5 से नीचे थायराइड होना चाहिए।
गर्भावस्था के 4 से 9 माह में थायराइड 3.5 से नीचे होना चाहिए।

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