फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब तंद्रा नहीं टूटी तो तबाही मचाएगी गंडक

Sat, 16 Jul 2016 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ महराजगंज
विज्ञापन
लापरवाही - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
नेपाल से निकलने वाली नारायणी गंडक नदी की बेलगाम धाराओं से हर साल होने वाली व्यापक कटान को रोकने और नदी की धारा का रुख बदलने के लिए एनसी बांध पर स्वीकृत करीब सात करोड़ की परियोजना विभागीय सुस्ती के चलते बेमतलब साबित हो रही है। मानसून की पहली अच्छी बारिश से ही अर्जुनी के निकट नदी तेज कटान करते हुए बंधे की तरफ बढ़ने लगी है। गांव पर खतरा मंडराता देखकर गांववालों में विभाग के खिलाफ खासा आक्रोश है।
विज्ञापन


परियोजना में ठोकर संख्या चार से लेकर अर्जुनी जंगल किनारे तक नदी में उतर कर एक रोल में नायलान क्रेट में बालू भरी बोरियों का बेस बना कर परकोपाईं लगाया जाना था। परियोजना की स्वीकृति और टेंडर के तत्काल बाद विभाग ने परियोजना की संवेदनशीलता के मद्देनजर अनुबंध भी कर दिया। अनुबंध के बाद बरसात के पूर्व  काम भी शुरू हो गया। शुरुआती दौर में काम ने रफ्तार पकड़ी लेकिन वक्त बीतने  के साथ परियोजना की चाल धीमी पड़ती चली गई।
लिहाजा अनुबंध के महीनों बाद भी अधूरी पड़ी परियोजना बाढ़ से निपटने को लेकर विभागीय संवेदनशीलता की पोल खोल रही  है। 

अभी तक इस परियोजना में एक करोड़ की लागत से 11 हजार 220 परकोपाईं की ढलाई हो चुकी है। पर इनको नदी में लगाने का काम अब तक नहीं हो पाया। पथलहवां में सिंचाई विभाग की  मिनी स्टोर के निकट हजारों की संख्या में लगे परकोपाईं के चट्टे परियोजना का हाल बयां कर रहे हैं। इस सबंध में अधिशासी अभियंता विरेंद्र कुमार यादव का कहना कि कार्य अंतिम चरण में था लेकिन अचानक जलस्तर बढ़ने से काम ठप हैं। जल्द ही पूरा करा लिया जाएगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें