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Maharajganj News: सांप डसे तो झाड़-फूंक के चक्कर में न फंसें, चली जाएगी जान

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समय पर अस्पताल पहुंचने पर मिल जाता है इलाज, बच जाती है जिंदगी
सीएचसी व जिला अस्पताल में उपलब्ध है सर्पदंश पर लगने वाली एआरवी
जिला अस्पताल में प्रत्येक दिन आ रहे सर्पदंश के दो से तीन मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। गर्मी और बरसात के कारण सांप अपने बिलों से बाहर आ गए हैं। ऐसे में वह मनुष्यों का डस भी ले रहे हैं। सांप के डसने पर अधिकतर लोग झांड़-फूंक के चक्कर में पड़कर जान गंवा दे रहे हैं। डॉक्टर कहते हैं कि सांप के काटने पर तुरंत अस्पताल आना चाहिए। उपचार के बाद जान बच जाती है।
बरसात में बिलों में पानी भरने की वजह से अधिकतर सांप बाहर निकल आए हैं। इन विषधरों का रोजाना कोई न कोई शिकार हो रहा है। जागरूकता के अभाव में लोग पीड़ित को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने लगते हैं। मरीज को इसका कोई लाभ नहीं मिलता है उल्टा उसकी जान और चली जाती है। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण बीते माह दो लोगों की मौत हो चुकी है। 10 लोगों का संयुक्त जिला चिकित्सालय में उपचार कराया गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण इलाके में पेश आती है।
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बीत 22 जून को बृजमनगंज के ग्राम नौसागर टोला मंडूरे में सांप काटने से 30 साल की नीतू की मौत हो गई। परिजन अस्पताल ले जाने के बजाए पहले झांड़-फूंक के चक्कर में पड़ गए थे। हालत बिगड़ी तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनकटी ले गए, जहां से चिकित्सकों ने रेफर कर दिया। परिजन मेडिकल कालेज गोरखपुर ले गए। वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

बीते माह निचलौल थाना क्षेत्र के मिश्रवलिया गांव में जहरीले सर्प के काटने से कुतुबुद्दीन अंसारी (60) की मौत हो गई थी। धान की फसल देखने के लिए खेत गए थे। उनके पैर में सर्प ने काट लिया, जिससे उनकी हालत बिगड़ने लगी। परिजन उन्हें निचलौल सीएचसी ले गए। हालत बिगड़ती देख चिकित्सक ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां पर भी स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में भर्ती कराया गया। बुधवार की रात कुतुबुद्दीन की मौत हो गई।
10 जुलाई को निचलौल नगर पंचायत के जिगनहवा मुहल्ला निवासी रामकिशोर की पत्नी रेखा (40) को जहरीले सांप ने डस लिया। घटना के समय वह घर के बाहर सफाई कर रही थीं। परिजन निचलौल सीएचसी ले गए। गंभीर हालत देख डॉक्टरों ने जिला अस्पताल को रेफर कर दिया। इलाज के बाद वह ठीक हो गईं।
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अस्पताल में हैं पर्याप्त इंजेक्शन
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि जिस स्थान पर सर्प ने डसा है वहां से ऊपर के तीन अलग-अलग स्थानों पर रस्सी से बांध दें। नई ब्लेड से जहां सर्प ने डसा है, वहीं पर चीरा लगा दें। इसके बाद फौरन पीड़ित को अस्पताल ले जाएं। कोशिश करें की मरीज सोने न पाए। जिला अस्पताल में सांप के डसने पर लगने वाले पर्याप्त इंजेक्शन हैं। अस्पताल में 24 घंटे सेवा रहती है। सर्पदंश के शिकार लोगों को अस्पताल लाकर इलाज कराएं।

बरसात के दिनों में सांप अपने बिल से बाहर निकलता है। सांप इंसान से डरता है, इस वजह से वह घर के किसी कोने में दुबका रहता है। रात को बिस्तर से उठना हो तो पहले नीचे रोशनी से देख लें। जिस कमरे में समान ज्यादा हों वहां आने-जाने के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतें। टार्च साथ में रखें।
- झिन्ना लाल सपेरा
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कहां हो सकते हैं सांप

सुनसान जगह या जहां इंसान की आवाजाही कम है। जैसे गोदाम आदि में सांप हो सकते हैं। भोजन के लिए चूहे की तलाश में सांप घरों तक पहुंच जाते हैं। यह रात में ज्यादा एक्टिव रहते हैं। जानकारों की मानें तो सांप खतरा महसूस होने पर ही हमला करते हैं।



सर्पदंश पर ये होता है

अगर सांप डस ले तो जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचें। हाथ या पैर में डस ले तो बंधन लगा सकते हैं। जिस जगह बाइट किया है, वहां हल्का सा कट लगाकर सिरिंज से निडिल निकालकर उससे खून निकाल सकते हैं। इससे खून के माध्यम से जहर बाहर निकलेगा। घबराहट और भागने-दौड़ने से जहर तेजी से फैलेगा। सांप जिस जगह डसता है, वहां दर्द शुरू हो जाता है। 15-20 मिनट बाद सूजन आ जाती है। एक घंटे बाद पूरे शरीर में सूजन आनी शुरू हो जाती है। सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। दिखाई देना कम हो जाता है। सांप डसने की स्थिति में तीन तरह की एंटी वैनम हीमोटॉक्सिन, न्यूरोटॉक्सिन, साइकोटॉक्सिन दी जाती हैं।
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जिले में 4-5 प्रकार के सांप
दुनिया में दो हजार प्रकार तो भारत में करीब 272 प्रकार के सांप मिलते हैं। इनमें 80 प्रतिशत जहरीले नहीं होते हैं। भारत में 58 प्रकार के सांप जहरीले हैं, जिनके डसने से मौत हो सकती है। जिले और आसपास में चार-पांच प्रकार के सांप हैं, जो जहरीले हैं। इसमें कोबरा शामिल है। जहरीले सांपों में कॉमन इंडियन करैथ है। यह कोबरा से भी 15 गुना जहरीला है।
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