महराजगंज। जनपद में इस बार दुर्गा उत्सव की मूर्तियां का विसर्जन एनजीटी की सख्ती के बीच होगा। नदियों में प्रतिमा विसर्जित नहीं की जा सकेगी। प्रशासन द्वारा बनाए गए अस्थायी तालाबों में ही मूर्तियां विसर्जित की जाएंगी। नियमों का उल्लंघन करने पर समितियों पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
जनपद में इस बार जनपद मुख्यालय सहित फरेंदा, पनियरा, सिसवां, परतावल, घुघली, निचलौल आदि क्षेत्रों में कुल 1715 दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। मूर्ति विसर्जन की प्रक्रिया 21 अक्तूबर से शुरू होगी। अलग-अलग क्षेत्रों में विसर्जन की तिथि अलग रखी गई है। प्रशासन ने प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। इस बार दुर्गा उत्सव में प्रतिमा विसर्जन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ी चेतावनी जारी की है। जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए अतिरिक्त सख्ती बरती जाएगी।
पूजन सामग्री अलग करना अनिवार्य : जल स्रोत को प्रदूषित होने से बचाने के लिए विसर्जन स्थल पर पहुंचने वाली मूर्तियों से पूजन सामग्री को विसर्जन से पूर्व अलग करना अनिवार्य होगा। फूल-माला, चुनरी, नारियल और अन्य पूजन सामग्री को निर्धारित स्थान पर सुरक्षित रखा जाएगा। अस्थायी तालाबों में विसर्जन के बाद बचा मलबा, बांस-बल्ली और अन्य सामग्रियों को 24 घंटे के भीतर बाहर निकालना अनिवार्य होगा। चिह्नित विसर्जन स्थलों पर अस्थायी तालाब बनाए जाएंगे। सभी आयोजन समितियों को इन्हीं तालाबों में प्रतिमा विसर्जित करनी होगी। विसर्जन स्थल पर प्रकाश व्यवस्था, क्रेन, स्टेज, लाउडस्पीकर, पेयजल और साफ-सफाई जैसी सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। एसडीएम और सीओ स्तर के अधिकारी विसर्जन स्थलों पर मौजूद रहकर निगरानी करेंगे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती भी की जाएगी।
प्रतिमा विसर्जन होने तक गुल रहेगी बिजली : 2025 में विसर्जन के वक्त ट्रैक्टर ट्रॉली पर लदी प्रतिमा में करंट उतरने की घटना को देखकर प्रशासन विशेष सतर्कता बरतेगा। एसडीओ विद्युत वितरण खंड प्रथम महराजगंज सुरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि जिन क्षेत्रों में विसर्जन होगा वहां बिजली आपूर्ति फीडर से ही बाधित रहेगी। विसर्जन स्थलों पर रोशनी के लिए जनरेटर की व्यवस्था की जाएगी, ताकि अंधेरे में कोई हादसा न हो और विसर्जन सुचारु रूप से संपन्न हो सके।