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शिकारी खुद यहां शिकार हो रहे

Sat, 19 Dec 2015 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो /महराजगंज
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सोहगीबरवा के जंगलों में रह रहे तेंदुओं का जीवन संकट में है। पेट की आग शांत करने के लिए खुद की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। एक साल में एक दर्जन से अधिक तेंदुए शिकार के चक्कर में गांव पहुंचे। जिसमें चार को लोगों ने मार डाला। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग का क्षेत्रफल करीब 43000 हेक्टेयर है। इसके अंतर्गत मधवलिया, निचलौल, शिवपुर, लक्ष्मीपुर, पकड़ी, उत्तरी चौक, दक्षिणी चौक रेंज आते हैं। इस प्रभाग में तेेंदुआ, हिरन, नीलगाय, सूअर जैसे वन्य जीव हैं। बिहार के बाल्मीकि नगर तथा नेपाल के चितवन से सटा होने के कारण कभी कभार बाघ, गैंडे व हाथी भी दिखते हैं।
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एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो एक दर्जन से अधिक तेंदुए शिकार के लिए जंगल से निकलकर गांव की ओर पहुंच गए। कुछ तो पकड़े गए जबकि चार तेंदुए गांव वालों का शिकार बने। वन विभाग की माने तो तेंदुआ अपनी भूख मिटाने के लिए गांव की ओर कुत्ते व अन्य जानवरों के शिकार में पहुंच रहा है। एक तेंदुआ का आहार एक दिन में सात से आठ किलो मांस है। जंगल में हिरन और नीलगाय ही उसके मुख्य आहार हैं। जब उन्हें इतना मांस खाने को नहीं मिलता तो वह गांव की ओर कुत्ते व बकरी के शिकार में पहुंच जाते हैं। वन विभाग की ओर से भी उनके आहार के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। डीएफओ शिवाजी राय के जवाब प्रश्न- अब जंगल से गांव की ओर तेंदुए भाग रहे हैं, आप क्या कारण मानते हैं। -तेंदुए शिकार के चक्कर में गांव की ओर आ जा रहे हैं। एक तेंदुआ का आहार सात से आठ किलो मांस का है। जंगल में हिरन व नीलगाय नहीं मिलने पर कुत्ते, बकरी के चक्कर में गांव में आ रहे हैं। प्रश्न-वन्य जीवों के आहार के लिए कोई व्यवस्था होती है -ऐसा कोई बजट नहीं है जो तेंदुए के लिए हो। तेंदुआ जंगल में रहता है और उसका आहार हिरन व अन्य जानवर है। वन विभाग की ओर से उसके आहार के नाम पर कोई बजट नहीं है। प्रश्न-तेंदुए को मारने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है -तेंदुआ वन संरक्षित जीव है। इसे मारने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाता है। जेल जाने से लेकर सजा तक का प्रावधान है। चौक व लक्ष्मीपुर मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया है। अब तक शिकार हुए तेंदुए 1- दस जून को लक्ष्मीपुर रेेंज के गुरचहिया व पकड़ियार के सिवान में तेंदुआ देखकर गांव वालों ने वन विभाग को सूचना दी। टीम जब तक पहुंचती गांव वाले ईंट पत्थर चलाकर अधमरा कर दिए थे।फरेंदा रेंज कार्यालय लाने के बाद उसने दम तोड़ दिया। 2-नौ दिसंबर को चौक थाना क्षेत्र के नक्सा बक्सा में तेंदुए को गांव वालों ने वन विभाग की टीम के सामने ही ईंट पत्थर से हमलाकर मार डाला। तेंदुआ छह लोगों को घायल कर पेड़ पर चढ़ा था। वन विभाग की टीम कुछ नहीं कर सकी। 3- 24 अप्रैल को एक तेंदुआ पकड़ी जंगल में मृत पाया गया। उसकी शरीर पर चोट के निशान थे। आशंका है कि गांव वालों ने पीट-पीटकर मार डाला। मामले में जहां गांव वाले भी कुछ बोलने से बचते रहे वहीं वन विभाग की टीम भी चुप रही। 4-वर्ष 2003 में निचलौल के कुड़िया बीट में एक तेंदुआ मृत पाया गया था। उस समय भी गांव वालों के मारने से मौत की बात सामने आई थी लेकिन वन विभाग की टीम ने जंगली सूअर से लड़ाई में तेंदुए की मौत की बात कहकर चुप रहने में ही भलाई समझी।
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