महराजगंज। जिला अस्पताल में ऑफलाइन व्यवस्था पूरी तरह से ऑनलाइन अभी नहीं हुई है। इस बीच मरीजों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। कभी-कभी तो पर्ची काउंटर पर घंटों मरीजों को कतार में खड़े रहना पड़ता है। उधर, डॉक्टर के कक्ष में भी अभी कंप्यूटर नहीं लगा है। करीब एक साल पहले 15 कंप्यूटर जिला अस्पताल को मिले थे। इसमें दो पर्ची काउंटर व दो लैब में लगे हैं। शेष गोदाम की शोभा बढ़ा रहे हैं।
जिला अस्पताल में पेपरलेस ओपीडी बनाने की योजना धराशायी हो गई है। करीब एक साल पहले दो डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिलाने के बाद जिम्मेदारों ने इधर से नजरें फेर ली। इस दिशा में कुछ खास पहल नहीं की जा रही है। दो काउंटरों पर कंप्यूटर से पर्ची कटती है। कंप्यूटर अस्पताल को मिले हैं। पूरे परिसर को वाईफाई से युक्त कर दिया गया है। अन्य जरूरी संसाधन मंगाने की दिशा में कोई पहल नहीं होने से आज भी मरीजों को पर्चा लेकर इधर-उधर भटकना पड़ता है। जिला अस्पताल में एक जगह से दूसरी जगह कागजों का पुलिंदा लेकर घूमने से राहत दिलाने की व्यवस्था धराशायी हो चुकी है। सारा काम ऑनलाइन नहीं हो रहा। जिला अस्पताल में ओपीडी का पर्चा ऑनलाइन बनेगा, चिकित्सक भी ऑनलाइन ही दवा लिखेंगे और जांच रिपोर्ट भी चिकित्सक को ऑनलाइन ही मिल जाएगी। एक बार रजिस्ट्रेशन नंबर मिलने के बाद वही नंबर हर बार काम में आएगा।
यह व्यवस्था अब तक पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो सकी है। पर्ची लेकर डॉक्टरों के कक्ष के सामने मरीज खड़े रहते हैं। योजना के तहत सभी डॉक्टरों व कर्मियों का प्रशिक्षण होना है, लेकिन एक साल पहले दो डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिलाने के बाद किसी से ध्यान नहीं दिया। नेटवर्किंग पूरे अस्पताल में कराया जा चुका है। प्रिंटर भी जिला अस्पताल को मिला है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 900 मरीज इलाज कराने आते हैं।
विस्मिल नगर निवासी चंदन ने बताया कि पर्ची कटाने से लेकर इलाज कराने तक घंटे भर से ज्यादा वक्त लग जाता है। थोड़ी सी देर हो जाए तो लैब में जांच ही नहीं होती। ऑनलाइन व्यवस्था यहां पूरी तरह से काम नहीं कर रही है। मरीजों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं है।
ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके डॉ.एवी त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान में कंप्यूटर से पर्ची कटती है। जब सभी डॉक्टरों का प्रशिक्षण पूरा हो जाएगा तो व्यवस्था पूरी तरह से अस्पताल में प्रभावी हो जाएगी।
आगे नहीं बढ़ पा रही आभा एप से जोडने की कवायद
महराजगंज। जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को आभा एप से जोडने की कवायद आगे नहीं बढ़ पा रही है। शुरुआत में जहां तेजी आई। अब वहीं इस एप से महज आठ से 10 मरीज ही जुड़ पा रहे हैं। इससे मरीजों को ऑनलाइन सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को आभा एप से जोडने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी। इस एप की खासियत यह है इसपर एक बार मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो जाता है। उसके बाद मरीज की पूरी हिस्ट्री एप पर मौजूद रहेगी। दोबारा मरीज जब भी अस्पताल आएगा तो पहले कौन सी बीमारी थी और क्या इलाज चला यह सब एप पर मौजूद रहेगा। साथ ही अस्पताल में विभिन्न बीमारियों की जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन मिलेगी। इसके लिए मरीज को पैथोलॉजी जाने की जरूरत नहीं होगी। पर्चा बनवाने के लिए लाइन में भी नहीं लगना पड़ेगा। क्यूआर कोड से तुरंत पर्चा बन जाएगा। इस एप की शुरुआत जिला अस्पताल में करीब पांच माह पहले हुई थी। काउंटर पर क्यूआर कोड लगा है। ज्यादातर मरीज इसके बारे में जानते भी नहीं हैं
अस्पताल में ऑनलाइन पर्ची कट रही है। मरीजों का बेहतर इलाज किया जा रहा है। पूरी ओपीडी को पेपरलेस बनाने के लिए जरूरी प्रक्रिया जल्दी पूरी कर ली जाएगी।
-डॉ. एपी भार्गव, सीएमएस