कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत बसंतपुर गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में फर्जी दस्तावेज के सहारे 13 साल से नौकरी कर रहे सहायक अध्यापक की नियुक्ति निरस्त कर दी गई। बृहस्पतिवार को पुलिस ने खंड विकास अधिकारी निचलौल की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है।
निचलौल खंड शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार मिश्रा ने पुलिस से बताया कि ठूठीबारी गांव के रहने वाले उमाकांत पांडेय ने 27 जुलाई 2021 को आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत की थी।
कहा था की राजाराम गोंड की ओर से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र जारी कराकर अनुसूचित जनजाति कोटे के अंतर्गत 16 अगस्त 2014 को प्राथमिक विद्यालय बसंतपुर में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति करा ली।
मामले की जांच के लिए 23 अगस्त 2022 को कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महराजगंज की ओर से खंड शिक्षा अधिकारी सदर और बृजमनगंज को जांच अधिकारी नामित किया गया।
दो अक्तूबर 2022 को उपलब्ध कराई गई जांच आख्या के मुताबिक 30 जुलाई 2020 के अनुसार जाति प्रमाणपत्र के सत्यापन के लिए एकल अधिकारी की ओर से कार्रवाई न करके जनपद स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की ओर से कार्रवाई करने का प्राविधान है।
जबकि राजाराम गोंड का जाति प्रमाण पत्र तहसीलदार घोसी, जनपद-मऊ की ओर से 28 अक्तूबर 2013 को जारी किया गया है। ऐसे में उक्त प्रमाण पत्र की जांच के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जिलाधिकारी मऊ को डाक से पत्र भेजा गया था।
जिला समाज कल्याण अधिकारी मऊ ने तीन अप्रैल 2023 को अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दी। उसके बाद विभाग की ओर से 24 अप्रैल 2023 को राजाराम गोंड को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन राजाराम गोंड ने 12 मई 2023 तक स्पष्टीकरण नहीं दिया। इसके बाद विभाग ने छह मार्च 2024 को राजाराम गोंड की नियुक्ति निरस्त कर दी
इस संबंध में कोतवाली ठूठीबारी थाना प्रभारी निरीक्षक नीरज राय ने बताया कि आरोपी राजाराम गोंड सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय बसंतपुर के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
प्राथमिक विद्यालय बसंतपुर में सहायक अध्यापक रामराज गोंड अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी कर रहे थे।
अब केस दर्ज हो गया है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से फर्जीवाड़े में अब तक 50 से अधिक शिक्षक बर्खास्त हो चुके हैं। नियुक्ति में फर्जीवाड़े की पोल खुलने से बेसिक शिक्षा विभाग एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।