राम मंदिर आंदोलन और गोरक्षपीठ का संबंध अटूट है। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर राम मंदिर निर्माण तक गोरक्षपीठ की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। चौक बाजार स्थित गुरु गोरक्षनाथ के प्राचीन मंदिर में पहले गोरक्षनाथ की चरण पादुका की पूजा होती थी, लेकिन बाद में जब राम मंदिर आंदोलन को धार देने के लिए महंत दिग्विजयनाथ चौक में बार-बार आने लगे तब मूर्ति स्थापित की गई।
जानकार बताते हैं कि राम मंदिर आंदोलन में दिग्विजयनाथ व महंत अवेद्यनाथ के लिए चौक बाजार के गोरक्षनाथ मंदिर का विशेष योगदान रहा है। महंत दिग्विजयनाथ के बाद महंत अवेद्यनाथ चौक बाजार में एक सप्ताह रहकर मंदिर आंदोलन की रणनीति बनाते थे। चौक निवासी तामेश्वर वर्मा कहते हैं कि महंत अवेद्यनाथ हमेशा कहते थे कि एक दिन मंदिर जरूर बनेगा। आखिरकार वह शुभ घड़ी आ गई, जिसका वर्षों से लोगों को इंतजार था। अयोध्या की पावन भूमि पर प्रभु श्रीराम पधार रहे हैं और उनके भव्य मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है। भगवान राम के इस भव्य मंदिर के निर्माण से अयोध्या की पहचान धर्म नगरी के रूप में होने लगी है। यह धर्म, आध्यात्म, संस्कृति के साथ-साथ विकास का भी केंद्र बनेगी।
पंडित बृहस्पति शास्त्री ने कहा कि गजब संयोग है कि उसी पीठ के एक महंत ने राम मंदिर आंदोलन को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया था और मंदिर-मंदिर कहते हुए समाधि ले ली तो वहीं के महंत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में भगवान राम की भव्य मंदिर का निर्माण पूरा करके मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा हो रही है।