राम मंदिर आंदोलन के दौरान मैं और कई अन्य रामभक्त अयोध्या जा रहे थे, लेकिन गोरखपुर में ही पुलिस ने रोक दिया। इस पर हम सभी खूनीपुर चौराहे पर ही दरी बिछाकर प्रभु श्रीराम की तस्वीर रखकर कीर्तन भजन शुरू कर दिए। उसके बाद पुलिस ने लाठियों से पीटकर वहां से भगा दिया। ऐसी भगदड़ मची कि नंगे पांव भागना पड़ा था। भागने के दाैरान पैर में कांटी चुभ गई थी, लेकिन उस वक्त वह दर्द भी पता नहीं चला। तब जो पुलिस अयोध्या जाने से रोकने के लिए लाठी तक चला देती थी। आज दिन बदले हैं तो वही पुलिस फूल बरसा रही है। इस सुकून देनेवाला है।
ये बातें कस्बे के आजादनगर मोहल्ले के रामसेवक साहू ने कही। वह अपने आवास पर राम मंदिर आंदोलन की यादों को साझा करते हुए दिवाली मनाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गोरखपुर में लाठी खाते हुए किसी तरह अपने कमरे में पहुंचा। पूरे शहर में भगदड़ मचा गई थी। साइकिल से अपने घर महराजगंज रात में आया था। उस वक्त किसी के मरने पर प्रशासन द्वारा आठ दस लोगों की अनुमति दी जाती थी। गुजरे वक्त को याद करते हुए रूह कांप जाती है। आज मंदिर बनने का सपना साकार हुआ है। प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इस ऐतिहासिक क्षण को देखने तो नहीं जा रहा हूं, लेकिन घर में परिवार के साथ टीवी पर प्रसारण देखूंगा।