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Maharajganj News: अस्पताल संचालकों ने डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर से 30 फाइलों के पास कराए थे बीमा क्लेम

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इंश्योरेंस ठगी: पुलिस ने डॉक्टर की तहरीर पर अस्पताल संचालकों पर दर्ज किया एक और केस
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मेडिकल रिकार्ड में डॉक्टर एके सिंह के नाम से पिछले साल रजिस्टर्ड हुआ था डिसेंट अस्पताल

इंश्योरेंश ठगी के पर्दाफाश के बाद डाॅक्टर ने पुलिस से संपर्क कर दर्ज कराया बयान
गोरखपुर। रामगढ़ताल थाना क्षेत्र स्थित डिसेंट हॉस्पिटल में 1.20 करोड़ रुपये की इंश्योरेंस ठगी के मामले में एक और पर्दाफाश हुआ है। अस्पताल संचालकों ने पूर्व में हॉस्पिटल में तैनात डॉ. एके सिंह का 30 फाइलों में फर्जी हस्ताक्षर कर फर्जी मरीजों का बीमा क्लेम पास कराया था। पर्दाफाश के बाद डॉक्टर एके सिंह ने अस्पताल संचालक शमशुल कमर उर्फ सोनू खान व प्रवीण त्रिपाठी उर्फ विकास मणि के खिलाफ फर्जी दस्तावेज के जरिये धोखाधड़ी समेत अन्य गंभीर धाराओं में रामगढ़ताल थाने में बृहस्पतिवार को एक और केस दर्ज कराया है।

एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि डिसेंट हाॅस्पिटल पिछले साल एक मार्च 2024 से एक मार्च 2025 तक डॉ. एके सिंह के नाम से मेडिकल रिकाॅर्ड रजिस्टर्ड था। उसका संचालन थाना क्षेत्र के गेहुंआसागर निवासी शुमशुल कमर और कोतवाली के मेवातीपुर निवासी प्रवीण त्रिपाठी कर रहे थे। एक मार्च के बाद डॉ. एके सिंह डिसेंट अस्पताल को छोड़कर तारामंडल स्थित एक निजी अस्पताल में शिफ्ट हो गए। इसके बाद से डिसेंट अस्पताल का रजिस्ट्रेशन पेंडिंग पड़ा है।
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फर्जीवाड़े की शिकायत के बाद पुलिस ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि हॉस्पिटल संचालक, डॉक्टर व बीमा कंपनी के एजेंट ने एक सोची-समझी साजिश के तहत मरीजों का नाम फर्जी फाइलों में डाला। उनमें कई तो कभी भर्ती ही नहीं हुए थे। वहीं, कुछ मरीजों का इलाज सामान्य था, लेकिन कागजों पर बड़े ऑपरेशन और लंबी भर्ती की एंट्री कराई गई। इसी आधार पर करोड़ों का बिल बनाकर बीमा कंपनियों से क्लेम ले लिया गया।
डिसेंट अस्पताल से बीमा क्लेम पास करने के लिए जो फाइल भेजी गई थी उसमें डॉ. एके सिंह के हस्ताक्षर थे। पुलिस ने जब डॉक्टर से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने मरीजों का इलाज किया और न ही किसी क्लेम फाइल पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने बताया कि इस ठगी से उनकी छवि धूमिल हुई है। बीमा कंपनियों और मरीजों के बीच उनकी साख को नुकसान हुआ है। उनका पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
मामले की जानकारी के बाद डॉ. एके सिंह ने अस्पताल संचालकों के खिलाफ रामगढ़ताल थाने में तहरीर दी। एसपी सिटी के अनुसार, डाॅक्टर की तहरीर पर अस्पताल संचालकों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
15 बीमा कंपनियों को ई-मेल भेजकर मांगी संदिग्ध क्लेम की डिटेल
एसपी सिटी ने 15 बीमा कंपनियों को ई-मेल भेजकर संदिग्ध क्लेम की डिटेल मांगी है। इन बीमा कंपनियों में बजाज आलियांश जनरल इंश्योरेंस कंपनी, एको हेल्थ इंश्योरेंस, चोलामंडलम इंश्योरेंस, गुड हेल्थ, एसडीएफसी एगरो, हेल्थ इंडिया, आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, मेडी, एसबीआई इंश्योरेंस, स्टेट हेल्थ समेत 15 इंश्योरेंस कंपनियां शामिल हैं। इस सभी कंपनियों को ई-मेल कर पिछले एक साल में हुए संदिग्ध क्लेम की डिटेल और बीमा करने वाले एजेंटों की सूची मांगी गई है।
पहले भी आ चुकी हैं शिकायतें
पुलिस रिकॉर्ड में यह भी सामने आया है कि डिसेंट हॉस्पिटल के खिलाफ पहले भी अनियमितताओं की शिकायतें दर्ज हुई हैं। इलाज के नाम पर अधिक वसूली और फर्जी बिल बनाने जैसी शिकायतें स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची थीं लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। अब बड़े पैमाने पर बीमा ठगी का मामला उजागर होने के बाद स्वास्थ्य महकमे पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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बीमा कंपनियां भी अलर्ट
फर्जीवाड़े के पर्दाफाश के बाद बीमा कंपनियों ने भी अपनी आंतरिक जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, कंपनियां अब अन्य प्राइवेट अस्पतालों से भी पिछले साल के क्लेम फाइलों की पड़ताल करने की तैयारी में हैं ताकि ऐसे और मामले पकड़े जा सकें।
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