महराजगंज। भारत के बड़े शहरों से खुदरा सामान नेपाल के कारोबारी मंगाते हैं। एक से दो हजार रुपये खर्च करने पर बगैर बिल के सामान रोडवेज या निजी बसों से आसानी से आ जाता है। इसमें टैक्स व कस्टम डयूटी आसानी से बच जाती है। गत्ते में क्या पैक है, इससे चालक या परिचालक को कोई मतलब नहीं रहता है। पगडंडियों से कारोबारी अपना सामान मंगा लेते हैं। प्रत्येक दिन करीब 30 से 40 कारोबारियों का सामान आता है। यह खेल खुलेआम चलता है, लेकिन जिम्मेदार इससे बेखबर हैं।
सूत्रों की माने तो दिल्ली, लखनऊ समेत अन्य शहरों से फूटकर सामान नेपाल के कारोबारी मंगाते हैं, इससे उनको दोहरा फायदा होता है। पहले तो सामान सस्ता मिल जाता है, फिर जीएसटी समेत कस्टम डयूटी का भी चक्कर नहीं रहता है। इस नेटवर्क में तमाम युवक शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि काठमांडों से दिल्ली और बनारस रोड पर चलने वाली निजी बसों से बिना बिल का माल सोनौली लाया जाता है। बस सुबह पांच बजे सोनौली बॉर्डर पर लग जाती है। पहले से सक्रिय नेपाल व्यापारियों के कैरियर तैनात रहते हैं और बस पहुंचने के पूर्व ही इन्हें बस की लोकेशन और नंबर नेपाल के कारोबारी देते हैं। बस पहुंचते ही आब्रजन कार्यालय से पहले बसों से सामान उतार लिया जाता है, फिर सोनौली में बनाए गए अवैध गोदाम में रखकर पगडंडियों के रास्ते नेपाल पहुंचा दिया जाता है। इससे सरकार को लाखों का चूना लगाया जा रहा है।
बाजार में कम दाम पर बेचा जाता है सामान
दिल्ली कानपुर और प्रदेश के बाहर से टैक्स चोरी करके लाया गया माल बाजार में कम दाम पर बेच दिया जाता है। जिससे जीएसटी अदा करने वाले व्यापारी टैक्स चोरी कर माल लाने व बेचने वालों के सामने टिक नहीं पाते। व्यापारियों ने इसकी शिकायत कई बार की लेकिन आयकर विभाग और प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।