महराजगंज। आनंदनगर-घुघली रेल परियोजना के लिए इस रूट के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों से भूमि अधिग्रहण का कार्य तेजी से चल रहा है। अधिगृहित भूमि का मुआवजा प्रशासन कृषि भूमि के तहत पूरा करने की बात कह रहा है। वहीं काश्तकार काॅमर्शियल दर पर भुगतान चाहते हैं, क्योंकि रेल रूट के तहत कई ऐसे गांवों की जमीन आ रही है, जो शहरी क्षेत्र के दायरे में आती है। उसका काॅमर्शियल रेट चाहते हैं।
आनंदनगर-घुघली रेल परियोजना की स्वीकृति मिल चुकी है। अब इस रूट के अंतर्गत आने वाले हिस्सों के भूमि अधिग्रहण होगा। इस परियोजना के जरिए ही महराजगंज जनपद मुख्यालय रेल सुविधा से जुड़ सकेगा। इसी मामले को लेकर दो दिन पहले अधिग्रहित भूमि के काश्तकारों ने एडीएम का घेराव किया था, लेकिन उन्हें कुछ स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। कुलदीप राय, कृष्ण मोहन शुक्ल, अंकुर गुप्ता, कैलाश प्रसाद अग्निहोत्री का कहना है कि उनकी भूमि का अधिग्रहण हो रहा है वह जिला मुख्यालय के आसपास है। ऐसे में जो भूमि रेल परियोजना के लिए ली जा रही है, उसका मुआवजा कामर्शियल रेट के हिसाब से मिलना चाहिए, लेकिन प्रशासन कृषि दर के अनुसार भुगतान की तैयारी कर रहा है।
अगर ऐसा होता है तो किसानों को नुकसान झेलना पड़ेगा। अंकुर गुप्ता, विनय मिश्रा, प्रवीण निषाद आदि काश्तकार कहते हैं कि तमाम किसानों की पुश्तैनी जमीन इस रेल रूट के अंतर्गत आने के कारण ली जा रही है। साथ-साथ उन जमीनों का अधिग्रहण भी हो रहा है जिसे की महंगे दर पर खरीदा गया है। ललित, गुलाब साहनी, दीनदयाल, अशोक पटेल का कहना है कि अगर प्रशासन काॅमर्शियल रेट के अनुसार भुगतान नहीं होगा तो संघर्ष किया जाएगा।