एक जिला, एक उत्पाद में फर्नीचर का चयन होने से बढ़ा कारोबार, देश के बड़े महानगरों में जाता है महराजगंज का सोफा व फर्नीचर
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में फर्नीचर कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। करीगरों को जहां काम मिला रहा है, वहीं, प्रोत्साहन मिलने से कारोबार भी आगे बढ़ रहा है। जबसे एक जिला, एक उत्पाद में फर्नीचर का चयन हुआ, तबसे इस क्षेत्र में व्यवसायियों का रुझान बढ़ा है। वन क्षेत्र से जुड़े इस जनपद में बेशकीमती लकड़ियां आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। इस कारोबार में करीब 5,000 लोगों को काम मिला है।
जनपद वन संपदा के मामले में धनी है। यहां कुशल कारीगर भी हैं। मजबूत व टिकाऊ फर्नीचर बनते हैं। ऐसे में यहां से अन्य प्रांतों में भी फर्नीचर की आपूर्ति की जाती है। ग्रामोद्योग कार्यालय में हर साल करीब 10 से 12 बेरोजगार युवकों को काष्ठ कला व्यवसाय के लिए ऋण दिया जाता है।
उद्योग कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, एक जिला, एक उत्पाद का शुभारंभ 2018-19 में हुआ। योजना के तहत वर्तमान में 1,050 को टूल किट दी गई है। इससे उनको काम करने में आसानी हुई। 60 लोगों को ऋण दिए गए हैं।
गुडविल फर्नीचर उद्योग को 25 लाख, बभनौली में अमरनाथ फर्नीचर उद्योग को 50 लाख का ऋण मिला है। खान फर्नीचर की एक करोड़ ऋण लेने की फाइल बैंक में है। योजना के तहत कारोबार को आगे बढ़ाने में उचित प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिले की पहचान फर्नीचर कारोबार से तमाम परिवारों का गुजर-बसर हो रहा है। नक्काशी वाले फर्नीचरों की मांग ज्यादा रहती है।
बिहार से लेकर बड़े महानगरों में भेजा जाता है फर्नीचर
निचलौल ब्लॉक के खानौली निवासी सेवानिवृत्त सैनिक गौरीशंकर गुप्ता ने फर्नीचर उद्योग में पहचान बनाई है। शुरुआत में उन्होंने हिम्मत जुटाई। पूंजी लगाई और जिले में फर्नीचर कारोबार शुरू किया। उनका फर्नीचर केवल जिले में ही नहीं अन्य प्रदेशों में भी भेजा जा रहा है। गौरीशंकर 2003 में सेवानिवृत्त हुए तो लुधियाना में व्यवसाय करने चले गए। कई शहरों को देखा और सुना लेकिन वहां मन नहीं लगा। उन्हें अन्य प्रदेशों में फर्नीचर की किल्लत दिखी। 2013 में महराजगंज आए तो फर्नीचर को उद्योग बना लिया। दो साल बाद गोरखपुर रोड पर बैकुंठपुर में अपने निजी मकान में शोरूम खोल लिया। गोरखपुर, पडरौना, डुमरियागंज में भी शोरूम खोले।
फर्नीचर उत्पाद के लिए उपयुक्त
महराजगंज जिले में लगभग 342 वर्ग किमी क्षेत्र वन से घिरा हुआ है। यह पूरे जिले के लगभग 11.59 प्रतिशत क्षेत्र के बराबर है। यह जिला वन से घिरा होने के कारण विभिन्न फर्नीचर के उत्पाद के लिए उपयुक्त है। कारण यह कि यहां मुख्य तौर पर साल के पेड़ मौजूद हैं। यह विभिन्न प्रकार के फर्नीचर उत्पादों जैसे कि कुर्सी, दरवाजा, बिस्तर, सोफा, मेज इत्यादि के उत्पाद में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सामग्री है। यहां फर्नीचर के कुशल कारीगर भी हैं।
घर के करीब ही काम मिला तो बाहर नहीं जाता हूं। आमदनी से घर-गृहस्थी की गाड़ी आसानी से चल रही है। गुजरे वक्त में दिल्ली, मुंबई काम के लिए जाना पड़ता था।
-तप्सीर आलम, कारीगर, धनेवा-धनेई
पांच साल पहले मुंबई में रहकर काम करता था। अब जिले में ही कारोबार आगे बढ़ा तो काम यहीं मिल गया। तीन साल से यहीं रहता हूं। अब बाहर जाने का कोई मतलब नहीं है।
-एहसान खान, कारीगर, मोहम्मदपुर
जिले में फर्नीचर का कारोबार ज्यादा है। काम भी यहां खूब मिल रहा है। यहां की कारीगरी का कोई जवाब नहीं है। आसपास के जनपदों में यहां के फर्नीचर की मांग ज्यादा है।
-लल्लल चौहान, कारीगर, महराजगंज
वर्ष 2015 में कारोबार शुरू किया। धीरे-धीरे कारोबार को आगे बढ़ाता रहा। शुरुआत में बैंक से 35 लाख का लोन लिया था। ओडीओपी के तहत एक करोड़ लोन जल्द मिल जाएगा। 20 से 25 लोगों को काम दिया हूं। कारोबार आगे बढ़ रहा है।
-अख्तर खान, फर्नीचर कारोबारी
कारखाने में कुल 150 कारीगर व श्रमिक काम में लगे हैं। फर्नीचर की बिहार में जबरदस्त मांग है। कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, बनारस समेत कई नगरों में भी फर्नीचर की मांग बढ़ी है।
-गौरीशंकर गुप्ता, फर्नीचर कारोबारी
जिले की पहचान फर्नीचर कारोबार से है। यहां के फर्नीचर मजबूत होने के साथ ही आकर्षक भी होते हैं। ग्राहक इस वजह से ज्यादा पसंद करते हैं।
-दीपक गुप्ता, फर्नीचर कारोबारी
कोट
ओडीओपी के तहत इस वर्ष का लक्ष्य पूरा हो चुका है। चयनित लाभार्थियों को योजना के तहत ऋण मिला है। इससे उनका कारोबार बढ़ रहा है। जिले में करीब 5,000 लोगों को रोजगार मिला है।
-अभिषेक प्रियदर्शी, उपायुक्त उद्योग केंद्र