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Maharajganj News: फर्जी प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाकर खुद को भी डाल रहे खतरे में

Thu, 30 Mar 2023 01:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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प्रदूषण जांच केंद्रों पर गाड़ी का फोटो लाकर देने पर भी बन जाता है प्रमाणपत्र
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प्रदूषण प्रमाणपत्र लेने के लिए बाइक का एक साल का शुल्क महज 55 रुपये, प्रत्येक वाहन की अलग-अलग दर निर्धारित


संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में फर्जी प्रदूषण प्रमाणपत्र बनाए जा रहे हैं। फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर लोग खुद को भी खतरे में डाल रहे हैं। लोग नियमों की धज्जियां तो उड़ा ही रहे हैं, स्वयं को बीमार भी बना रहे हैं। धुआं उगलते वाहनों पर लगाम न कसने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जांच के नाम पर कभी-कभी कार्रवाई कर विभाग के अधिकारी खामोश हो जाते हैं।

जिले में 3,70,356 वाहन पंजीकृत हैं। सामान ढोने वाले वाहन 2,361 हैं। सामान ढोने वाले हल्के वाहन 2,754 पंजीकृत हैं। 759 बस सवारी ढोने वाली पंजीकृत है। 877 स्कूल बसें पंजीकृत हैं। टैक्सी 747, हल्के यात्री वाहन 3,295 पंजीकृत हैं। स्कूटर 2,328, मोपेड 8,082 के अलावा मोटरसाइकिल 3,27,724 पंजीकृत हैं। कार 6,915, जीप 4,344 पंजीकृत हैं। ट्रैक्टर 24,197 पंजीकृत हैं।
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जिले में पंजीकृत वाहनों में प्रदूषण प्रमाणपत्र कितने वाहनों के हैं। इसके बारे में विभाग को जानकारी नहीं है। प्रत्येक माह औसतन 4,312 वाहनों का प्रदूषण प्रमाणपत्र बनने का दावा किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि प्रदूषण जांच केंद्रों पर गाड़ी का फोटो लाकर देने पर भी प्रमाणपत्र बन जाता है। वाहन लाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
केंद्रों पर जांच में लापरवाही के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। विभाग जांच केंद्रों पर शिकंजा कसने में फेल है। जिले में तमाम स्थानों पर इधर-उधर धुआं उगलते हुए वाहन सड़क पर दिख जाते हैं।

जिले में प्रदूषण जांच के 12 केंद्र
वाहनों के प्रदूषण की जांच के लिए जिले में 12 केंद्र बने हैं। इन केंद्रों पर जांच के लिए यंत्र लगे हैं। एक पाइप साइलेंसर में डालकर कंप्यूटर से जोड़ दिया जाता है। बाइक स्टार्ट करते ही कंप्यूटर में प्रदूषण का स्तर बताने लगता है। वाहन को मौके पर ले जाना जरूरी होता है।

प्रदूषण प्रमाणपत्र की सरकारी फीस
बाइक एवं स्कूटी 55 रुपये
तीन पहिया वाहन 75 रुपये
चार पहिया पेट्रोल वाहन 75 रुपये
चार पहिया डीजल वाहन 105 रुपये

इतना लगता है जुर्माना
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं है तो वाहन चलाते समय पकड़े जाने पर 10,000 रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। इसके बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं होता है। नियमों का पालन करने को लेकर लोग गंभीर नहीं हैं।

इसकी होती है जांच
पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) टेस्ट में गाड़ियों के धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और अन्य कणों की जांच होती है। जांच के आधार पर पीयूसी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है कि गाड़ी उत्सर्जन और प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों को पूरा करती है।
कोट
पेट्रोल वाहनों से वायु प्रदूषण के रूप में कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, सल्फरडाई ऑक्साइड और डीजल वाहनों से नाइट्रोजन के ऑक्साइड धुआं सूक्ष्म कण एल्डीहाइड और गंधक का उत्सर्जन होता है। ये कण शरीर में जाने पर खतरनाक साबित होते हैं। ये लोगों को बीमार बना रहे हैं। वाहनों के प्रदूषण के स्तर की जांच हर हाल में ठीक ढंग से करानी चाहिए।
-डॉ. एवी त्रिपाठी, जिला अस्पताल
कोट
प्रदूषण की जांच समय-समय पर की जाती है। प्रमाणपत्र नहीं रहने पर जुर्माना वसूल किया जाता है। नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। जांच में कहीं गड़बड़ी मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी।
-आरसी भारतीय, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी
कोट
जिले में प्रदूषण स्तर 91 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। यह मध्यम स्तर का है। जिन लोगों को सांस की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर है, उनको सावधानी बरतने की जरूरत है। 150 से 250 के बीच एक्यूआई खराब स्थिति मानी जाती है।
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-कैलाश पांडेय, मौसम विशेषज्ञ

फोटो
जांच में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों को प्रदूषण की जांच करनी जरूरी है। प्रमाणपत्र बनवाने के लिए जागरूक करने की भी करने में जरूरत है।
-शशांक मिश्रा, इंदिरा नगर

फोटो
अगर प्रदूषण को लेकर सजगता नहीं दिखाई गई तो आने वाले दिनों में समस्या हो जाएगी। कई जगह तो बगैर गाड़ी ले जाए ही प्रमाणपत्र बन जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए।
-अशफाक खान, राजीव नगर
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