महराजगंज। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत जिले के सहायता प्राप्त व संस्कृत विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए भले ही प्रयास किए जा रहे हो, मगर हकीकत यह है कि अब तक धन न मिलने से कहीं भी काम शुरू नहीं हो सका है। इससे स्थिति जस की तस बनी है। वहीं सुधार का दावा भी बेदम दिख रहा है।
परिषदीय विद्यालयों में बदलाव का प्रतीक माने जा रहे कायाकल्प योजना की तर्ज पर माध्यमिक स्कूलों की दशा को सुधारने के लिए प्रोजेक्ट अलंकार चलाया गया। लंबे समय से जिले में चलने वाले अशासकीय सहायता प्राप्त व संस्कृत विद्यालय न सिर्फ जर्जर हैं, बल्कि बदसूरत भी दिखते हैं। इस वित्तीय वर्ष में संस्कृत विद्यालयों की स्थिति को सुधारने के लिए प्रस्ताव मांगा गया। 13 विद्यालयों की ओर से कमियों काे सही कराने के लिए छह करोड़ से अधिक की सहायता राशि की मांग भी की गई, मगर अब तक धनराशि न मिलने से सुधारात्मक कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।
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इन विद्यालयों को है धन का इंतजार
जिले के बद्रीदास संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खैंचा, लुंबिनी संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फरेंदा, योगेश्वर संस्कृत विद्यालय बांसपार व मदन मोहन मालवीय संस्कृत विद्यालय परतावल का प्रोजेक्ट अलंकार से सुधार कराना है। इसी प्रकार अशासकीय सहायता प्राप्त जिन नौ विद्यालयों की स्थिति को सुधारना है उसमें नौतनवां इंटर कॉलेज, अभिनव विद्या मंदिर, संतलाल इंटर कॉलेज, एंग्लो संस्कृत इंटर कॉलेज, सैयद अहमद जनता इंटर कॉलेज, विश्वंभरनाथ जनता इंटर कॉलेज, जीएसवीएस इंटर कॉलेज, पंचायत इंटर कॉलेज व राष्ट्रीय इंटर कॉलेज बाली का नाम है।
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प्रोजेक्ट अलंकार के तहत स्कूलों की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए छह करोड़ से अधिक की मांग की गई है। धनराशि आते ही कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।
-अमरनाथ राय, जिला विद्यालय निरीक्षक