बस स्टेशन पर घर जाने के लिए बस में चढ़ते यात्री।
महराजगंज। रक्षाबंधन पर बहनों को मुफ्त यात्रा की सौगात दुश्वारियाें से भरा रहा। पहले तो समय से बस नहीं मिली, अगर आ भी गई तो बैठने के लिए धक्का-मुक्की करनी पड़ी। लोकल रूटों पर महिलाओं को टेंपो-टैक्सी का सहारा लेना पड़ा। जिम्मेदारों ने रक्षाबंधन पर बेहतर ढंग से मुफ्त यात्रा कराने का दावा किया था, लेकिन ये दावे हकीकत में फेल नजर आई।
सोमवार को महराजगंज शहर के बस स्टेशन पर महिलाओं की भीड़ लगी रही। दोपहर करीब एक बजे के बाद रक्षाबंधन बांधने का शुभ मुहूर्त था। इस वजह से बहनें जल्दी बस स्टेशन पहुंच गईं। यहां कोई घंटे भर परेशान रहा तो कोई डेढ़ घंटे तक इधर-उधर भटकता रहा। दोपहर 12 बजे एक बस आई तो उसमें बैठने की हाेड़ लग गई। काफी जद्दोजहद के बाद कुछ महिलाओं को बैठने के लिए जगह मिली। इसके पीछे दूसरी बस भी आई, उसमें भी बैठने के लिए धक्का-मुक्की करनी पड़ी।
गोरखपुर रूट पर जाने के लिए थोड़ी कम परेशानी हुई, लेकिन ठूठीबारी रूट पर अधिक समस्या हुई। सिसवा जाने के लिए ज्ञानती देवी स्टेशन पर आईं तो उनको पता चला की कोई बस नहीं है। वह आगे बढ़ीं और टेंपो से सवार होकर चली गईं। इसी तरह चौक बाजार आने के लिए शांति देवी परेशान दिखीं। वह आसपास के दुकानदारों से पूछ रही थीं। इस तरह से स्टेशन परिसर में महिलाएं गंतव्य तक जाने के लिए परेशान दिखीं। बसें स्टेशन पर आई तो उसमें बैठने के लिए होड़ लगी रही। एक बजे के पहले तक यह समस्या बनी रही।