जान जोखिम में डालकर आबादी की ओर बढ़ रहे जंगली जानवर
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जून की भीषण गर्मी में मैदानी इलाके के साथ जंगल के तालाब भी सूख गए हैं। जंगल में छोटे-बड़े तालाबों के सूखने से वन्य जीव हिरन, नीलगाय, बंदर, सूअर जैसे वन्य जीवों को समस्या हो रही है। प्यासे जानवर उन स्थानों तक लंबी दौड़ लगाने को मजबूर हैं, जहां उन्हें थोड़ा बहुत पानी मिलने की उम्मीद दिख रही है। जिन तालाबों में थोड़ा बहुत पानी था, उन्हें मछलियों के शिकार में लगे लोगों ने काफी पहले ही सूखा दिया। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों को पानी के अभाव में तड़प रहे बेजुबानों की सुधि लेने की फुर्सत नहीं है।
जानकारी के अनुसार, उत्तरी चौक रेंज के सिंगरहना ताल सहित दो-तीन छोटे तालाबों में पानी मौजूद है, लेकिन वह भी जलकुंभी से ढका है। इसके बावजूद जान जोखिम में डालकर जानवर पानी पीने को मजबूर हैं। कभी-कभी दलदल में फंसकर नीलगाय जैसे जानवर जान तक गंवा बैठते हैं। तालाबों के सूखने का सबसे बड़ा कारण यह है कि दशकों से इनके रख-रखाव पर ध्यान नहीं दिया गया है।
पहाड़ी नदियों के बाढ़ में बहकर आए सिल्ट के कारण भी बहुत से तालाब पट कर मैदान बन चुके हैं। बागापार के रामदीन, रामप्रकाश ने बताया कि जंगल में वन्यजीव संरक्षण का दावा खोखला साबित हो रहा है। अवैध कटान रोकने में असफल विभाग के अधिकारी व कर्मचारी अब जानवरों को पीने के पानी तक की व्यवस्था करने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। रख-रखाव के अभाव में जगपुर, धंगरहवा, पकड़ी, चौक, बेलासपुर, नाथनगर, सोनाड़ी स्थित पोखरे सूख गए हैं।
पकड़ी रेंज के क्षेत्रीय वनाधिकारी मोहन सिंह का कहना है कि पड़वा नाला, रोहिन नदी, कुड़ीअहवा एवं जगपुर ताल सहित अन्य तालाबों में पानी है। वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।