नेपाल में बारिश की वजह से जिले में बहने वाली राप्ती व रोहिन नदी बुधवार को भी लाल निशान पार कर बहती मिली। दोनों नदियों के खतरे के निशान के उपर बहने से बंधे के किनारे रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ी हुई है। वहीं गंडक, प्यास व चंदन नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई। महाव नाला भी आधा फीट घट कर बहता पाया गया।
अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड द्वितीय राजीव कपिल ने बताया कि मंगलवार की तुलना में बुधवार को रोहिन नदी के जलस्तर में .28 मिलीमीटर की कमी आई है, मगर वह खतरे के निशान से अभी भी 0.70 मिलीमीटर उपर बह रही है। राप्ती नदी के जलस्तर में मंगलवार की तुलना में 0.08 मिलीमीटर की बढ़ोत्तरी पाई गई। गंडक नदी खतरे के निशान से 0.60 मीटर, चंदन नदी 1.05 मीटर तथा प्यास नदी 0.40 मिलीमीटर नीचे बहती पाई गई। महाव नाले का जलस्तर कम मिला। हालांकि जिले में बुधवार की सुबह आठ बजे तक तीन मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई। 10 बजे के बाद खिली धूप दिन भर जारी रही।
| नदी/नाले का नाम |
खतरे का निशान |
जलस्तर(बुध्वार शाम चार बजे ) |
| रोहिन नदी |
82.44 मीटर |
83.14 मीटर |
| राप्ती नदी |
80.30 मीटर |
80.38 मीटर |
| गंडक नदी |
365.50 मीटर |
350.00 मीटर |
| चंदन नदी |
101.05 मीटर |
99.20 मीटर |
| प्यास नदी |
102.25 मीटर |
100.85 मीटर |
| महाव नाला |
5.5 फीट |
ढ़ाई फीट |
बर्बाद हुई फसल का मुआवजा दिलाने के लिए सौंपा ज्ञापन
महराजगंज। बीते दिनों हुई बारिश की वजह से खेतों में जलभराव हो गया है। जिससे फसल बर्बाद हो गई है। जंगल दुधई उर्फ चेहरी गांव के लोगों ने बुधवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मुआवजा दिलाने की मांग की। लोगों ने कहा कि फसल बर्बाद होने के कारण खेत में लगी पूंजी भी नहीं निकल पाएगी।
राजेंद्र चौधरी ने कहा कि खेत में जलभराव होने से फसल पूरी डूब गई है। बर्बाद फसलों का आकलन कराते हुए मुआवजा दिलाया जाए। अगर फसलों का मुआवजा नहीं मिला तो किसानों को अगली फसल के बुवाई में दिक्कत होगी। इस मौके पर संतकृपाल, राम अवध, राजू, जगदीश निषाद, राकेश आदि मौजूद रहे।