महराजगंज। मोहर्रम उर्फ राहुल खान के काले कारनामे की चर्चा बूढ़ाडीह कला गांव के रघु टोला में हो रही है। वह पांच माह पहले लड़कियों को कार से लेकर निचलौल आया था। उसके जानने वालों ने पूछताछ की तो उसने अपना दोस्त बताया था।
उसी समय से लोगों को शक था, लेकिन किसी ने गहराई में तथ्यों को जानने की कोशिश नहीं की। लड़कियों की खरीद-फरोख्त के धंधे में शामिल होकर मोटी कमाई के चक्कर में फंसा गया।
उसका नेपाल से भी कनेक्शन होने की चर्चा है। नेपाल से भी वह लड़कियों को झांसा देकर भारतीय क्षेत्र में लेकर आता था। सूत्रों की माने तो वह लोगों की नजरों से बचकर धंधे को अंजाम दे रहा था। नौकरी का झांसा देकर लड़कियों को बेचता था। निचलौल थाना क्षेत्र के बूढ़ाडीह कला गांव के टोला रघु का मोहर्रम उर्फ राहुल खान पहले दिल्ली में पिता के पास रहकर सिलाई करता था। इसमें उसका मन नहीं लगा। जल्द अमिर बनने की चाहत में वह इस धंधे में कूद पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक मोहर्रम के इस काले करतूत का गांव निवासी कुछ युवकों को पहले ही भनक लग चुकी थी, लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि आरोपी मोहर्रम बातों के जाल में फंसाकर पहले लड़कियों को झांसे में लेता था।
इसके बाद मोहर्रम गिरोह के कुछ सदस्यों के मदद से उन लड़कियों के लिए राजस्थान, हरियाणा सहित कई जगहों पर सौदा करता था। फिर सौदे के मुताबिक लड़कियों को पहुंचता था।
बताया जा रहा है मोहर्रम खुद उन लड़कियों को कार से राजस्थान और हरियाणा लेकर जाता था। इसका वीडियो पोस्ट भी मोहर्रम के फेसबुक एकाउंट राहुल खान के नाम पर अपलोड है। इतना ही नहीं आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट पर कई तरह के वीडियो देखने के बाद उसके करतूत की भनक लगनी शुरू हो गई थी। मामला पकड़ में आने के बाद उसके सोशल मीडिया पर गतिविधियों को देखा जा रहा है।
सूत्रों की माने तो गांव में आने के दौरान वह किसी से बहुत घुलता मिलता नहीं था। उसे डर रहता था कि कहीं उसके धंधे को लोग जान न जाएं। लोग बताते हैं कि वह अक्सर नेपाल भी जाता था। उसके साथ आने वाले युवा भी किसी से कोई बात नहीं करते हैं।
धंधे से होने वाली आमदनी को नहीं करता था जाहिर : गांव के एक युवक ने बताया कि गांव में दो माह पहले वह मिला था तो बहुत परेशान था, उसे देखकर नहीं लग रहा था कि वह ऐसा धंधा कर रहा है। बातचीत करने पर भी उसने किनारा कस लिया। उस वक्त वह फोन पर किसी से बात करते हुए आगे बढ़ गया। उसके हाव-भाव संदेहास्पद लग रहे थे। लोग बताते हैं कि धंधे से होने वाली आमदनी को जाहिर नहीं होने देता था।