महराजगंज/घुघली। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश काेर्ट संख्या चार ने 12 वर्ष पूर्व दहेज हत्या में दोषी मिलने पर तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट के फैसले के बाद मंगलवार को तीनों को जिला कारागार से रिहा कर दिया गया। साक्ष्य के अभाव में पति और सास पहले ही रिहा किए जा चुके थे।
अधिवक्ता राजकिशोर यादव ने बताया कि 2012 सितंबर माह में गुड़िया की जलकर मौत हो गई थी। गुड़िया के मायके वालों ने ससुरालियों पर दहेज की मांग को लेकर हत्या करने का आरोप लगाकर पांच लोगों पर केस दर्ज कराया था। न्यायाधीश ने पति और को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया। जबकि ससुर राधे जायसवाल, देवर मुन्ना जायसवाल और देवरानी सीता देवी निवासी ग्राम सभा बुजुर्ग थाना घुघली को 2014 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। तीनों जिला कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे।
जिला न्यायालय में अपील के दौरान से ही राधेश्याम के घर की माली हालत खराब हो गई थी। उनकी पैरवी करने वाला कोई नहीं था, लेकिन जब जोगिया ब्रह्मस्थान मठ के महंत बालक दास को पता चला तो महंत बालक दास ने इस परिवार को देखभाल और मुकदमे का पूरा खर्चा उठाया और हाईकोर्ट इलाहाबाद में अपील दाखिल कर राधे जायसवाल के परिवार का आजीवन कारावास से बेल कराने के लिए कई बार प्रयास किया, लेकिन बेल न मिलने के कारण अधिवक्ता ने सिफारिश कर फाइनल जिरह करने के लिए आवेदन किया। हाईकोर्ट में अपील पर मामले की सुनवाई हुई, इसके बाद सभी तथ्यों पर बहस किया गया। हाई कोर्ट ने तीनों को छह मार्च को दोष मुक्त करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दे दिया। मंगलवार को राधे जायसवाल का पूरा परिवार जेल से बाहर आ गया।