फरेंदा। आनंदनगर सब डिवीजन पोस्ट ऑफिस पर तैनात एसडीआई सीनियर ड्यूटी इंस्पेक्टर आलोक चौधरी सीबीआई के हत्थे चढ़ा तो उसकी पूरी पोल खुल गई। डाक कर्मचारियों से ट्रांसफर व पोस्टिंग के नाम पर रुपये ऐठना उसकी आदत बन गई थी। उसके कारनामे से डाककर्मी आहत थे। विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे, जिसके कारण उसका मनोबल बढ़ता गया। जब सीबीआई ने रंगे हाथ दबोचा तो कर्मचारियाें ने राहत की सांस ली।
आनंदनगर डाक ऑफिस पर डाक सहायक पद पर तैनात कर्मी ने रिश्वत मांगने की शिकायत एंटीक्रप्सन से की। मंगलवार को टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। चर्चा है कि सीबीआई की टीम आनंदनगर के किसी सरकारी डाकबंगले में दो दिनों से ठहरी थी, लेकिन इसकी भनक पुलिस या किसी अन्य को नहीं थी। कार्रवाई के बाद डाक कर्मचारी दबी जुबान से विभागीय अधिकारी के खिलाफ की गई कार्रवाई की चर्चा करने लगे।
टीम ने एसडीआई के आवास से पकड़कर लखनऊ ले गए। एसडीआई के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद डाक कर्मचारी उसके कारनामे की चर्चा करते रहे। चर्चाओं के अनुसार, कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत मिलती तो उनको संस्पेंड करने की धमकी देते हुए रुपये की मांग की जाती रही। अगर रुपया नहीं देते तो संस्पेंड करके कई माह तक घर बैठा दिया गया। एसडीआई को घूसखोर अधिकारी रुप में जाना जाता है। वह जहां भी रहे वहां पर आरोपों से गहरा नाता रहा है।
मई 2022 में आनंदनगर डिवीजन पर तैनाती के बाद से कई कर्मचारी उनके खिलाफ विरोध को मुखर हुए, लेकिन विभागीय अधिकारियों के दबाव में मामले को दबा दिया जाता था। आनंदनगर मुख्य कार्यालय व रूट पर होने के कारण कई कर्मचारी खुद का स्थानांतरण यहां कराना चाहते थे, जब इसकी मांग लेकर एसडीआई के पास जाते तो रुपये की डिमांड शुरू हो जाती थी। न देने पर उनको पिछड़ा या दूर-दराज के कार्यालय पर भेजा जाता था। विभागीय कर्मचारी भी उनके कार्यों से क्षुब्ध रहते थे। धानी क्षेत्र के एक डाककर्मी को भी मामूली शिकायत पर संस्पेंड कर दिया गया जो छह माह से घर पर बैठे हैं। मामूली तनख्वाह पाने वाले कर्मचारी से भी 40-50 हजार की डिमांड की जाती रही। कर्मचारी खुद का नाम न आए इसके लिए मुंह नहीं खोलते थे।