महराजगंज। मत्स्य विभाग किसानों की आय दोगुनी करने के लिए जून से अभिनव प्रयोग करने जा रहा है। इसके लिए जिले के ऐसे 1700 किसानों से विभाग संपर्क करेगा, जिन्होंने अपनी भूमि पर मत्स्य पालन के लिए तालाब खोदवाया है। उन्हें तालाब के किनारे सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित करेगा। ग्रामीण क्षेत्र में संचालित एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन) के संपर्क में हैं जो किसानों को सस्ते दर पर खाद बीज देने के साथ ही फसल भी खरीदें। इसके लिए पूर्वांचल केला क्रेडिट कंपनी निचलौल की बैठवलिया से बातचीत भी हो रही है। अन्य से भी वार्ता चल रही है।
केंद्र सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की पक्षधर है। चाहे किसान फसल उगाते हों या मत्स्य पालन करते हों। जिले में मौजूदा समय में 3400 तालाबों में मछली पालन हो रहा है। इसमें 1700 निजी तथा इतने ही पट्टा धारक हैं। अब जिले का मत्स्य विभाग गांव वार ऐसे मछली उत्पादक किसानों को चिह्नित करने में जुटा है, जिनके पास खुद के तालाब हैं तथा वह विभाग के पंजीकृत मछली उत्पादक हैं। ऐसे लोगों से बातकर विभाग उन्हें अनुदान पर सब्जियों की खेती के लिए पौधे और खाद उपलब्ध कराने जा रहा है।
इसकी खेती तालाब के किनारे होगी। सब्जी बेचने के लिए भी किसानों को कहीं नहीं जाना पड़ेगा। पौधों के साथ उर्वरक और कीटनाशक दवा अनुदान पर देने वाली संस्था उनसे बाजार भाव पर तैयार फसल खरीदेगी। भीटों पर कम छाया देने वाले पौधों में केला, लौकी, परवल, नेनुआं, ककड़ी-खीरा, तुरई, भिंडी, मिर्चा की खेती करवाने की योजना है। विभाग किसानों को तैयार करने में जुटा है कि वह अपने निजी तालाब के भीटों पर इसकी खेती कर मुनाफा प्राप्त करें।
सरकार किसानों की आय बढ़ाना चाहती है। इसलिए उन्हें सहफसली का उत्पादन करने की सलाह दी जा रही है। मत्स्य विभाग इस मुहिम में लगा है कि पंजीकृत तालाब रखने वाले किसान तालाब के किनारों पर शीघ्र पैदा होने वाली सब्जियों की खेती कर मुनाफा प्राप्त करें। विभाग किसानों को अनुदान देकर इस क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं के संपर्क में है।
-संजय कुमार, सहायक निदेशक मत्स्य