फरेंदा। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर काॅलेज में जन शिक्षा गोरक्ष प्रांत की ओर से नव चयनित आचार्य के प्रशिक्षण के छठवें दिन नई शिक्षा नीति के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में संस्कार के साथ अन्य विषयों पर भी चर्चा की गई। प्रशिक्षण प्रमुख दिनेश सिंह ने कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। इसी मूल भावना को मूर्त रूप देने के लिए इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। नई शिक्षा नीति भारत की शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन लाकर आत्मनिर्भर, वैश्विक नेतृत्व में सक्षम और संस्कारवान नागरिकों के निर्माण की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती इस नीति को जमीनीस्तर पर लागू करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। जनशिक्षा समिति गोरक्षप्रांत के प्रशिक्षण प्रमुख दिवाकर राम त्रिपाठी ने कहा कि विद्या भारती, निपुण भारत अभियान के तहत एनईपी के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। यह अभियान विद्यार्थियों में मूलभूत साक्षरता, गणनात्मक कौशल, नैतिकता और आत्म निर्भरता को विकसित करने के लिए केंद्रित करता है। प्रशिक्षण को प्रधानाचार्य गोविंद कुमार चतुर्वेदी, जियालाल, अशोक कुमार मिश्र, रविंद्र पटेल ने संबोधित किया। इस दौरान अंगद पाठक, सुनील पांडेय, अजीत, विनय, रामसुभग, सुजीत मौजूद रहे। संवाद