शिक्षण अधिगम सामग्री के सहारे बच्चों का ज्ञान बढ़ा रहे अंकुर और वरेश
पनियरा के परिषदीय विद्यालयों में नवाचार के जरिये हो रही पढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। छोटे बच्चों को पढ़ाना भले ही आसान समझा जाता हो, लेकिन वास्तविकता में ऐसा है नहीं। पहला तो मम्मी पापा से दूर हुए बच्चों को स्कूल में रोकना मुश्किल होता है। यदि वे रुक भी जाएं तो पढ़ाना और भी कठिन। परिषदीय विद्यालयों में कुछ ऐसी ही समस्या एक से पांच तक की कक्षाओं में देखने को मिलती है। मगर पनियरा क्षेत्र के शिक्षक अंकुर सच्चर व वरेश कुमार ने अपने नवाचार और शिक्षण अधिगम सामग्री यानी टीचिंग लर्निंग मटीरियल (टीएलएम) से अपने स्कूल में पढ़ाई की दशा और दिशा ही बदल दी है। वे खेल-खेल में बच्चों को कठिन से कठिन पाठ समझा जाते हैं।
नौतनवां ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मैनिहवा में तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक अंकुर सच्चर विद्यालय की प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ बच्चों को मनोरंजक तरीके से शिक्षा से जोड़ने की पहल कर रहे हैं। जादुई तालाब में मछली पकड़ो, पशु पक्षी की पहचान करो, जैसे नवाचार के साथ शिक्षण अधिगम सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। अच्छे कार्य के लिए इन्हें ब्लॉक व जिलास्तर पर पुरस्कृत भी किया जा चुका है।
इसी तरह पनियरा ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय रतनपुरवां में तैनात शिक्षक वरेश कुमार भी शिक्षण अधिगम सामग्री व कला आधारित शिक्षण कार्य के माध्यम से बच्चों को शिक्षा से जोड़ते हैं। वे गणित व हिंदी भाषा के शब्द चार्ट पेपर व अन्य माध्यम से तैयार कर बच्चों की पढ़ाई मनोरंजक बना रहे हैं। बच्चे बोर न हों, इसलिए अंकों की संख्या को वे फल, सब्जी, पशु-पक्षी आदि के माध्यम से बताने का प्रयास करते हैं। ऐसे नवाचार पर विशेष जोर देते हैं, जिससे स्कूली बच्चे तेजी से समझ विकसित कर सकें। बेहतर नवाचार के लिए इन्हें जिले से लेकर राज्य स्तर तक पुरस्कृत किया गया है।
अंकुर और वरेश का कहना है कि छोटे बच्चों में कुछ की ही समझ बेहतर होती है। कुछ की कमजोर और सामान्य होती है। जिनकी समझ बेहतर होती है, उन्हें विषय वस्तु जल्दी समझ में आ जाती है। मगर कमजोर समझ वाले बच्चों के साथ परेशानी होती है। उन्हें स्कूल में रोकना, पढ़ाई के प्रति आकर्षित करना कठिन होता है। उनकी समझ तभी विकसित होगी, जब शिक्षक उनके स्तर पर आकर मेहनत करेगा और पढ़ाई के प्रति भय दूर करेगा। पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना बहुत जरूरी है।
वर्जन
परिषदीय शिक्षकों पर छोटे बच्चों को शिक्षित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अन्य शिक्षक भी अंकुर व वरेश की तरह कार्य करते हुए बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का कार्य करें। इससे परिषदीय शिक्षा के प्रति लोगों की सोच बदलने में मदद मिलेगी।
आशीष कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी