महराजगंज। कॉपी-किताब के साथ स्टेशनरी के दामों में वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष तक प्राइमरी तक जो काॅपी, किताब, बैग व अन्य स्टेशनरी ढाई से तीन हजार रुपये में मिल जाता था, उसके लिए अब चार से पांच हजार तक चुकाने पड़ रहे हैं। सर्वाधिक बढ़ोतरी की बात करें तो प्लास्टिक टिफिन, पानी की बाॅटल में हुई है।
कागज महंगा होने के कारण नोटबुक उत्पादन की लागत बढ़ी है। पांच से 10 रुपये नोटबुक के रेट बढ़ चुके हैं जिसके कारण पांचवीं तक बच्चों के लिए स्कूल बैग, कापी किताब व स्टेशनरी की खरीद करने में अभिभावकों के पसीने छूट रहे। बर्रोहिया ढाला निवासी कारोबारी राजकुमार गुप्ता ने बताया कि सिर्फ किताबों पर पांच फीसदी जीएसटी है, बाकी नोटबुक रजिस्टर कागज का रेट बढ़ने के कारण महंगा हुआ है। वहीं स्टेशनरी पर 18 फीसदी की जीएसटी के कारण शिक्षा सामग्री पिछले वर्ष की तुलना में महंगी है। सबसे कम रेट का स्कूल बैग 150 रुपये का है जिसे एलकेजी के बच्चों के लिए अभिभावक खरीद रहे। इसकी क्वालिटी बहुत हल्की है। 1000 पेज वाली नोटबुक 384 रुपये की बिक रही, पिछले वर्ष रेट 360 था।
अभिभावकों को लग रही चपत
अमित कुमार वर्मा, मनोज कुमार पटवा, पंकज कुमार कन्नौजिया व रामकुमार ने बताया कि बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना मुश्किल होता जा रहा है। कापी, किताब व अन्य स्टेशनरी के लिए स्कूल सिर्फ दो तीन दुकान पर ही किताब रखवाते जहां से उनका कमीशन सेट रहता। निजी स्कूलों की किताब पहले सिर्फ एक दुकान पर होती थी, लेकिन प्रशासन के दखल पर अब स्कूल वाले दो से तीन दुकान पर किताब अपने मुद्रकों की रखवा रहे जिससे उनपर एक दुकान से सामग्री लेने के दबाव का आरोप न लगने पाए।