- पहले सकरे मुख्य मार्ग किनारे ही सिमटा था शहर, अब बढ़ रहा दायरा
- बदल रहा है सिद्धार्थनगर : शहर के आसपास जहां पानी भरा रहता था, वहां खड़ी हो गईं आलीशान इमारतें
- मेडिकल कॉलेज के बाद तेजी से बन रहे हैं निजी अस्पताल, होटल और मॉल बनने से भी बढ़ी सुविधाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पहले गांव सी सूरत वाला सिद्धार्थनगर आधुनिक शहर बनने की तरफ बढ़ चला है, तेजी से हो रहे सड़क एवं भवनों के निर्माण से शहर बदलता दिख रहा है। सकरे मुख्य मार्ग किनारे सिमटे शहर का दायरा अब निकट से गुजर रहे दो एनएच के इर्द-गिर्द फैल चुका है।
10 वर्ष पहले तक ऊबड़-खाबड़ सड़कें और सकरी गलियां हर तरफ खाली मैदान, लेकिन आज चौड़ी सड़कें, बड़ी-बड़ी बिल्डिंग, नए-नए मॉल ऊंची इमारतें, बड़ी-बड़ी दुकान, फ्लाईओवर और नई- फैक्ट्री, नए-नए होटल...। फर्राटे से वाहन दौड़ते हैं और शहर के चौराहे भी सुंदर और आकर्षक हो गए हैं। विस्तार लेते शहर में लंबे समय बाद लौटने वाले अपने घर को जाने वाले चौड़े रास्तों को पहचान भी नहीं पाते हैं।
शायद इसीलिए हर किसी की जुबान पर एक ही बात सुनाई देने लगी है... सिद्धार्थनगर बदल रहा है। यहां लखनऊ का अक्स झलकने लगा है। विदेशों में ही नहीं मुंबई-गुजरात और दूर-दराज रहने वाले सिद्धार्थनगर वासी भी पल-पल अपनों से पूछते हैं... और क्या-क्या बदल रहा है।
कुछ ऐसे ही विकास के पथ पर शहर बढ़ रहा है। जमुआर नाला पर शाम को लगने वाली भीड़ की सुंदरता अब लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। पुराने शहरवासी तो जानते ही हैं कि कभी पुरानी नौगढ़ से भीमापार और तेतरी बाजार रोड पर चलना दूभर था, सड़कें पतली थीं और वाहन स्टैंड होने से लंबा जाम लगता था।
अब यहां सड़कें चौड़ी हो गई हैं और चौराहे भी विकसित हो गए हैं। शाम को जमुआर नाले पर लगने वाली भीड़ लोगों को आकर्षित करती है।
शाम को ओवरब्रिज पर जलती स्ट्रीट लाइट मेडिकल काॅलेज रोड पर पार्क से लेकर बीएसए ग्रांउड पर टहलने वालों की भीड़ आकर्षित करती है। कभी इस रास्ते पर सन्नाटा छाया रहता था।
चौराहे के नजदीक ही सनई रोड पर मंगल की रेडीमेड कपड़ों की दुकान है। उन्होंने बताया कि चौराहा अब चौड़ा कर दिया गया है। इस बदलाव से मेडिकल कॉलेज रोड पर आवागमन सुगम हो गया है। रोड का चौड़ीकरण होने और ओवरब्रिज बनने के बाद जाम से निजात मिली है। इस रोड के बनने से शहर का विस्तार सनई बाजार तक हो गया है।
बदल गई सोहास रोड की पुलिया
अभी पांच साल पहले तक सोहास रोड पर शहर के जमुआर नाले पर बनी पुलिया लकड़ी की थी, जिससे इस रास्ते से बड़े वाहन नहीं जा पाते थे, लेकिन अब इस सड़क पर पुल बनने से लोगों को आवागमन में सुविधा हो गई है, जिससे अब बड़े वाहन भी आसानी से इस रास्ते से चले जा रहे हैं। इसे देखकर लोग कहते हैं, कि अब शहर बदल रहा है, लोगों को नई इमारतें देखने को मिल रही हैं।
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परसा शाह आलम से धेंसा...
पहले यह सकरी रोड थी, लेकिन अब चौड़ी हो गई है। पहले यह सड़क बहुत जर्जर थी, जिससे जाम लगता था, लेकिन अब इस सड़क पर फर्राटा से लोग आते-जाते हैं। इससे लोगों को आवागमन में पहले से ज्यादा सहूलियत मिल जाएगी।
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साड़ी तिराहा से बांसी स्टैंड तक...
पहले साड़ी तिराहे से बांसी स्टैंड होकर पुरानी नौगढ़ जाना पड़ता था, जिससे अक्सर जाम लग जाता था। भीमापार में बने रेलवे क्राॅसिंग से लोगों को घंटों जाम से जूझना पड़ता है, लेकिन ओवरब्रिज बनने के बाद लोगों को जाम से निजात मिली है। पुरानी नौगढ़ जाने के लिए लोगों को अब शहर में नहीं जाना पड़ता है, जिससे बाहर से आने वाले लोग कहते हैं, अब सिद्धार्थनगर बदल रहा है।
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नवीन मंडी रोड ...
गोबरहवा से हटाकर नई जगह पर मंडी बनाने के बाद उस पर जाने वाली सड़क की हालत जर्जर हो गई थी, जिससे मंडी जाने वाला कोई भी ट्रक सड़क के गड्ढों में फंस कर जाम का कारण बनता था, लेकिन अब ऐसा स्थिति नहीं है, अब इस सड़क पर आसानी से लोग आ जा सकते हैं।
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सकरा था उसका-तेतरी मार्ग...
पांच साल पहले तक उसका-तेतरी मार्ग पर चलना मुश्किल था, इस रास्ते के मोहल्ले पर रहने वाले लोग जाम और टूटी सड़कों से परेशान रहते थे, लेकिन अब सड़क सिंगल से टू-लेन हो गई है, जिससे इस चौराहे पर नए-नए मॉल और अच्छी दुकानें बन गई हैं। अब इस इलाके में जहां अच्छी कंपनियों के कार, बाइक, कपड़ा, ज्वेलरी, जूते के शोरूम हैं, तो होटल और रेस्टोरेंट की संख्या भी बढ़ रही है। नई- नई बिल्डिंगों के बनने से शहर की खूबसूरती और भी बढ़ गई है। इस रोड पर बैंकों की संख्या अधिक होने से इसको बैंक रोड के नाम से भी लोग जानते हैं।
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मेरा बचपन से लेकर बुढ़ापा तक इस शहर में बीत रहा है। सड़कें पतली थीं, तो हर तरफ जाम लगता था। कुछ ही प्रतिष्ठानों के शोरूम थे और गिने चुने होटल थे, लेकिन आज जिस रूट पर निकल जाइए, सब कुछ उपलब्ध है। इस शहर में अब परिवार के साथ घूमने के लिए कई जगहें हैं। वाकई, यह शहर अब बड़े शहरों की तरह दिख रहा है। मुझे लगता है कि दो-तीन वर्ष में फ्लाईओवर भी बन गया है। अगर कोई बहुत दिन बाद आएगा तो शहर के बदले हालत को देखकर बहुत खुश नजर आएगा।
-सुग्रीव लाल श्रीवास्तव सेवानिवृत्त शिक्षक
जिस शहर में चौड़ी सड़कें और ओवरब्रिज बने हों, वहां का विकास होना स्वभाविक है। सिद्धार्थनगर में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। अब यहां नए-नए मॉल, होटल और पार्क रोड पर सुबह से हो रही चहल-कदमी लोगों को आकर्षित कर रही है। लुंबनी व कपिलवस्तु स्तूप पर घूमने आने वाले लोग शहर के बदलाव को देखकर प्रशंसा करते हैं। नई-नई जगहों पर बदलाव होने से लोगों को टहलने के लिए नई जगह मिल रही है। मेडिकल कॉलेज बनने से लोगों को काफी सुविधाएं मिल रही हैं, और निजी अस्पतालों की बढ़ती संख्या भी सुविधाएं बढ़ा रही हैं।
-एसपी अग्रवाल, पूर्व चेयरमैन, नगर पालिका परिषद
चार साल पूर्व शहर की सड़कें संकरी थीं। चौड़ीकरण होने से हर जगह बदलाव नजर आ रहा है। लंबे समय के बाद आने वाले रिश्तेदार अक्सर मोहल्ले का रास्ता भूल जाते हैं। तब उनके फोन करने पर जानकारी दी जाती है।
- बैजनाथ, दुकानदार
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मेडिकल कॉलेज रोड के बगल में नई बिल्डिंग की संख्या बढ़ती जा रही है। नए होटल, दुकान सहित अन्य प्रतिष्ठान खुलते जा रहे हैं। हम लोगों ने कभी कल्पना नहीं की थी कि इतना बदलाव आएगा।
-अजय शुक्ला, दुकानदार
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शहर में हर ओर विकास हो रहा है। उसका-तेतरी मार्ग पर हर रोज जाम लगता था, लेकिन शहर के सड़कों को चौड़ा होने से लोगों को जाम से छुटकारा मिला है।
-सोनू पांडेय, राहगीर
विकास कार्य होने से खासकर चौड़ीकरण से लोगों को फायदा हो रहा है। जिस जमीन को कोई पूछता नही था उसका भी रेट दिन-प्रतिदिन चार गुना होता जा रहा है।
-कोकिला प्रसाद, किसान
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नगर निकाय का दर्जा पाने के बावजूद शहर का विकास अधूरा दिखता था, लेकिन अब तेजी से हो रहे विकास से बदलाव नजर आ रहा है। पहले सकरे मार्ग की जगह अब बस्ती व गोरखपुर जाने के लिए दो एनएच के साथ ही मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी के निर्माण से आधुनिक शहर बनने की तरफ अग्रसर है।
-योगेंद्र नाथ दुबे, अधिवक्त