महराजगंज। चंद पैसों की लालच में चालक तो लोगों की जान से खेल ही रहे हैं। वहीं लोग भी अपने जान की परवाह नहीं कर रहे हैं। सवारी गाड़ी को छोड़कर सामान ढोने वाली गाड़ी में बैठकर सफर कर रहे हैं। हद तो यह है कि अभिभावकों को अपने जिगर के टुकड़े की थोड़ी सी चिंता भी नहीं है। रविवार को शहर के मुख्य सड़क से ट्रॉली पर बैठक बच्चे जा रहे थे। वहीं कोतवाली के सामने जलकर रोड पर पिकअप में लोग बैठे दिखे।
कासगंज में ट्रैक्टर-ट्रॉली से हुए हादसों के बाद भी लोग अपनी जान की फिक्र नहीं कर रहे हैं और धड़ल्ले से इनका इस्तेमाल सवारियां ढोने के लिए कर रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए पुलिस का अभियान भी नाकाफी साबित हो रहा है। जबकि ट्रैक्टर पर सवारियां ढोने पर 10 हजार का जुर्माने का प्राविधान भी है। यातायात नियमों को दरकिनार कर इन दिनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भर-भर लोग ढोए जा रहे हैं। ऐसे में जहां इन पर सफर करने वाले लोगों की जिंदगानी खतरे में है वहीं इसके जिम्मेदार जानबूझ कर इससे अंजान बने हुए हैं।
अनदेखी का उदाहरण एक बार फिर से सामने आया। शहर में फरेंदा रोड पर कलश यात्रा में बच्चों समेत 30 लोगों को लेकर ट्रैक्टर, ट्राली गुजरी, लेकिन किसी से कुछ पूछने की जहमत नहीं उठाई। रविवार को शहर के साथ ही ग्रामीण अंचलों के मार्गों पर ट्रैक्टर ट्रॉलियां लोगों को भरकर फर्राटा भरती दिखीं।
अधिवक्ता संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि ट्रैक्टर ट्रॉलियों का प्रयोग नियमत: खेती किसानी के लिए किया जाता है, लेकिन अब पैसा कमाने के लालच में आजकल खुलेआम इसका प्रयोग व्यवसायिक तौर पर ज्यादा किया जा रहा है। कहीं पर लोगों को ढोने का काम किया जा रहा है तो कहीं पर मिट्टी, ईंटें और सरिया आदि ढोने का काम किया जा रहा है। इसके लिए बाकायदा कॉमर्शियल लाइसेंस की जरूरत होती है, लेकिन ऐसा नहीं है।