अभिभावक अपने बच्चों को लेकर आशंकित
संवाद न्यूज एजेंसी
महाराजगंज। नेहरू नगर के जिस बच्चे आदर्श को कुत्तों ने नोच कर मार डाला, वह काफी हृदय विदारक घटना रही। लोगों के मुताबिक आदर्श मानसिक रूप से कमजोर था। वह घूमते फिरते दिखाई देने वाले जहरीले सांपों के अलावा अन्य जानवरों को वह पकड़ लेता था। घर से गायब होने की दशा में कई बार आदर्श को चाइल्ड लाइन की टीम उसके घर लाकर छोड़ चुकी है। वह अक्सर घर से अचानक चला जाता था। कुत्तों के झुंड की चपेट में किस तरह से घिर गया, किसी को समझ में नहीं आ रहा है।
कुत्तों के नोचने से हुई 11 वर्षीय बच्चे की मौत ने पूरे वार्ड के लोगों की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना को लेकर अभिभावकों में काफी रोष और तनाव देखा जा रहा है। वे अपने बच्चों को लेकर काफी आशंकित हैं, और ऐसी घटनाएं कैसे रोकी जाएं इस पर स्वयं भी चर्चा कर रहे हैं, इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों की पहल की तरफ भी वे देख रहे हैं, कि लावारिस कुत्तों के खिलाफ कोई सार्थक कदम उठाए जाएं।
लापता न हो इसलिए हाथ पर लिखा था पता
आदर्श के बाबा जनार्दन शर्मा ने रोते हुए बताया कि पोता मानसिक रूप से कमजोर था। बेटे मुन्ना की तरह लापता न हो इसलिए पोते के हाथ पर पिपरदेउरा का पता लिखवाया था। पोता कहीं दूर चला जाए तो लोग उसे पते के अनुसार लाकर छोड़ दें। कई बार हाथ पर पता लिखे होने के कारण लोगों ने उसे घर लाकर छोड़ा था। कुत्ते इतने हिंसक कैसे हो सकते हैं, यह समझ में नहीं आ रहा है। कुत्तों के झुंड ने पूरी तरह से शरीर को नोच लिया।
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आर्थिक तंगी से जूझ रही शशिकला
लोगों के मुताबिक मुन्ना के लापता होने के बाद से शशिकला आर्थिक तंगी के चलते परेशान रहती है। लोगों के घरों में चौका, बर्तन कर दो बेटे आदर्श उर्फ झुम्मन, अंश और दो बेटियां सलोनी, गोल्डी की देखभाल कर रही है।
शहर में घूमते हुए कुत्तों के झुंड से खतरा बढ़ा
शहर में भ्रमण करने के दौरान आप सावधान रहें। थोड़ी सी चूक होने पर कुत्ते हमला कर सकते हैं। गांधी नगर, लोहिया, शास्त्री नगर समेत अन्य मोहल्लों में कुत्तों के झुंड दिखते हैं। बालक को कुत्तों ने नोच डाला, इस घटना के बाद शहरवासी परेशान हैं। शहर के ज्ञानदीप, राकेश, सूरज ने कहा कि कुत्तों को शहर से दूर हटाने के लिए नगर पालिका प्रशासन को व्यवस्था करनी चाहिए।
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हमें घटना का बहुत दुख है। इस तरह की समस्या का समाधान अवैध रूप से चल रही मीट की दुकानों को बंद कराकर व प्रभावी पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम चलाकर किया जा सकता है। अमूमन होता यह है कि मीट की दुकानों के खुलने से उन्हें खाने के लिए मीट मिलता रहता है, जब यह दुकानें किसी दिन बंद हो जाती हैं तो कुत्तों को खाने के लिए कुछ नहीं मिलता है। ऐसे में कुत्ते हिंसक हो जाते हैं। मीट की दुकानों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
-सुरभि त्रिपाठी, अहिंसा फेलो, पीपल फार एनिमल संस्था