हरीहरपुर में आयोजित मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में मरीजों का इंतजार करते फार्मासिस्ट उमेश चंद गुप्
महराजगंज/मिठौरा। मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में मरीजों का इलाज भगवान भरोसे हुआ। ज्यादातर डॉक्टर इलाज के प्रति गंभीर नहीं दिखे। कहीं डॉक्टर कमरे में आराम फरमा रहे थे, तो कहीं फार्मासिस्टों के भरोसे इलाज चल रहा था। रविवार को पीएससी हरिहरपुर कोहडवाल और मिठौरा की पड़ताल में खामियां सामने आईं। मरीजों को जैसे-तैसे दवा देखकर कर्मियों ने घर भेजकर दायित्व की इतिश्री कर ली।
पीएचसी हरिहरपुर में 11:30 बजे डॉक्टर नहीं दिखे। फार्मासिस्ट मरीजों को दवा दे रहे थे। मेले में कुल 22 मरीजों का इलाज हुआ था, जिसमें सर्दी, जुकाम, कमर दर्द और खांसी के मरीज आए थे। अस्पताल में खांसी की सिरप नहीं होने के कारण उसके स्थान पर दूसरी दवा देकर काम चलाया गया। सतीश प्रजापति ने बताया कि मेले में बेहतर व्यवस्था नहीं है।
सीएचसी मिठौरा में दोपहर 12 बजे तक 35 मरीजों का इलाज हो चुका था। ठंड की वजह से डॉक्टर कमरे में चले गए थे। जबकि मरीज उनका इंतजार कर रहे थे। बुखार से पीड़ित बरवा सोनिया निवासी सुमन ने बताया कि तीन दिन से बुखार से पीड़ित हूं। डॉक्टर साहब आएंगे तो दिखाने के बाद दवा लेकर घर जाउंगी। सीएचसी प्रभारी डॉ. मनोज कुशवाहा ने बताया कि कमरे पर नहीं जरूरी सामान लेने गया था। आने के बाद मरीजों की जांच कर दवा दी गई।
पीएचसी कोहड़वल दोपहर 12:30 बजे तक 29 मरीज का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ था। फार्मासिस्ट रमेश चंद्र गुप्ता मरीजों को दवा दे रहे थे। ज्यादातर मरीज सर्दी जुखाम, बुखार, खांसी और सांस के आए। फार्मासिस्ट रमेश चंद्र बताया कि दवाएं पर्याप्त हैं। मरीजों की जांच कर दवा दी गई।
आरोग्य मेले में संबंधित डाॅक्टरों को रहने का निर्देश दिया गया है। अगर कहीं लापरवाही हुई तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। आरोग्य मेले में इलाज का बेहतर इंतजाम रहता है।
-डाॅ. राकेश कुमार, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी