नहरों में पानी नहीं, किसान परेशान
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महराजगंज। इन दिनों की गेहूं की बुआई के लिए किसान परेशान हैं। नहर में पानी न होने से पंपिंग सेट के सहारे सिंचाई करनी पड़ रही है। वहीं सिल्ट से पटी सूखी नहरों में पानी छोड़ने के मसले पर विभाग गंभीर नहीं है।
जिले में करीब 1035 किमी लंबी नहरों में से 396 किमी नहर में सिल्ट सफाई की व्यवस्था की गई है। विभाग का दावा है कि 70 प्रतिशत सिल्ट सफाई का काम पूरा करा लिया गया है जबकि हो चुका है। नहरें अब भी सिल्ट से पटी हैं। यही नहीं, झाड़ियां भी उग आई हैं। किसानों ने समस्या का समाधान न होने पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है। जिले में एक लाख 73 हजार 764 हेक्टेयर में गेहूं, मसूर, सरसों, मटर आदि की बुआई हुई है। नहरों में पानी न आने से किसान परेशान हैं। गेहूं की बुआई के लिए खेतों को पानी की जरूरत है। ऐसे में नहर में पानी नहीं रहने के कारण किसानों को काफी दिक्कत हो रही है। डीजल महंगा होने के कारण खेंत की सिंचाई करने में किसानों की जेब ढीली हो जा रही है। सिंचाई खंड प्रथम के मुताबिक 1035 किमी लंबी नहर जिले की सीमा में है। इसमें 396 किमी नहर की सिल्ट सफाई की जरूरत है। सिल्ट सफाई का काम चल रहा है।उधर, बसडिला गांव के किसान हरिद्वार का कहना था कि नहरों में पानी न आने से खेत की सिंचाई में समस्या हो रही है। किसान हित के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। रजौरा गांव के अर्जुन ने बताया कि महंगाई के इस दौर में पंपिंग सेट से सिंचाई कराने में जेब ढीली हो जा रही है। पता नहीं कब नहर में पानी आएगा। समस्याओं के कारण खेती करना कठिन हो गया है। शीतलापुर गांव के मिठाई ने बताया कि नहर में झाड़ियां उगी हुई हैं। सिल्ट भी नहीं साफ किया गया है। नहर में पानी आया भी तो खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाएगा। यही नहीं, नहर की पटरियां भी तमाम स्थानों पर कटी हुई हैं। उसे भी ठीक नहीं कराया गया है। अधिशासी अभियंता सुरेश कुमार ने बताया कि अगले सप्ताह तक नहर में पानी छोडे़ जाने की संभावना है। नहर में सिल्ट सफाई का कार्य करीब 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है। जल्द ही नहर में पानी छोड़ने के लिए तेजी से सिल्ट सफाई का काम कराया जा रहा है।