महराजगंज। केएमसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजिस्ट की ओपीडी में सिरदर्द, नींद न आना, स्ट्रोक, मिर्गी के लक्षण वाले रोजाना 10-12 मरीज पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर जांच के बाद दवा के साथ बचाव का सुझाव दे रहे हैं।
केएमसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डाॅ. अजय गहलोत ने बताया कि न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के बारे में जानकारी जरूरी है। देखा गया है कि न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से पीड़ित मरीज न्यूरोलॉजिस्ट तक पहुंचने के पहले अपनी समस्या को काफी बड़ा कर देते हैं।
समान्यतः न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के कारण आपको चलने, बोलने, निगलने, सांस लेने या सीखने में परेशानी हो सकती है। ये आपकी याददाश्त, इंद्रियों या मनोदशा से संबंधित समस्याओं का भी कारण बन सकती है। न्यूरोलॉजिकल विकार कुछ स्थितियों में गंभीर भी माने जाते हैं, जिसमें जान जाने का भी जोखिम रहता है।
एक न्यूरोलॉजिस्ट मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और परिधीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाले विकारों का उपचार और निदान करता है, जिनमें सिरदर्द, नींद संबंधी विकार, मल्टीपल स्केलेरोसिस, मिर्गी, न्यूरोपैथिक दर्द, मनोभ्रंश, पार्किंसंस रोग और स्ट्रोक शामिल हैं। न्यूरोलॉजिक बीमारियां नींद को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे व्यक्ति सोते समय चिंतित या उत्तेजित हो सकता है और इस प्रकार दिन के दौरान थका हुआ महसूस करता है और उसे नींद आती रहती है।
अलग-अलग हो सकते हैं समस्याओं के विशिष्ट कारण
न्यूरोलॉजिस्ट डाॅ. अजय गहलोत कहते हैं कि तंत्रिका संबंधी समस्याओं के विशिष्ट कारण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इसमें आनुवंशिक विकार, जन्मजात असामान्यताएं या विकार, संक्रमण, कुपोषण सहित जीवनशैली या पर्यावरणीय स्वास्थ्य समस्याएं, मस्तिष्क की चोट, रीढ़ की हड्डी की चोट या तंत्रिका की चोट शामिल हो सकती हैं। आंखों की रोशनी का कमजोर होना, चक्कर आना और बोलने या निगलने में परेशानी का सामना करना। दौरे पड़ना, अंगों का मरोड़ना और बार-बार बेहोश होना। इसमें किसी तरह के लक्षण होने पर तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।