महराजगंज। जिले को खुले में शौच से मुक्त करने की राहत आसान नहीं है। जिले को अक्टूबर तक खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया है जबकि अब तक जिले के 929 ग्राम पंचायतों में से सिर्फ 201 को ही ओडीएफ घोषित किया जा सकता है।
अक्टूबर 2018 में जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित किया जाना है। मगर शौचालय निर्माण की प्रगति देख ऐसा नहीं लगता कि लक्ष्य तय समय में पूरा भी हो पाएगा। अभी निर्धारित लक्ष्य का आधा काम भी नहीं हो पाया है। जिले में अक्टूबर तक निर्धारित चार लाख पांच हजार शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य तो तय किया गया है लेकिन अभी लक्ष्य के अनुरूप पचास प्रतिशत भी प्रगति नहीं हो पाई है। जिले में अब तक एक लाख 85 हजार शौचालयों का निर्माण हो पाया है और साढ़े सात माह में दो लाख 20 हजार शौचालयों के निर्माण का काम बाकी है। यही कारण है कि अभी जिले के सिर्फ 201 ग्राम पंचायतों को ही ओडीएफ घोषित किया जा सकता है।
जिले के 929 ग्राम पंचायतों में से 728 ग्राम पंचायतों को साढ़े सात माह में ओडीएफ घोषित करने के लिए शौचालयों के निर्माण की रफ्तार तेज करनी पड़ेगी। लक्ष्य पूरा करने में अधिकारियों को पसीने छूट रहे हैं। यह स्थिति तब है जबकि शौचालयों के निर्माण के काम को गति देने के लिए विशेष पर्यवेक्षण भी किया जा रहा है। प्रगति की भी अलग - अलग स्तरों पर समीक्षा भी की जा रही है। उधर, जो गांव खुले में शौच से मुक्त घोषित किए जा चुके हैं, वहां भी स्थिति ठीक नहीं है। गांव के लोग आज भी खुले में शौच के लिए विवश हैं। आंकड़ों के मुताबिक घुघली ब्लॉक के कोटिया गांव के टोला खुटामैदान में 92 घरों में शौचालय बन चुके हैं। यह गांव ओडीएफ घोषित हो चुका है। लेकिन हकीकत यह है कि गांव में तमाम शौचालय अधूरे पडे़ हैं। आज भी गांव के कई लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं। गांव में नालियाें की सफाई भी नहीं हुई है। ग्राम प्रधान कोटिया माला चौहान कहना है कि गांव को खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया गया है। शौचालय निर्माण अधूरा होने के सवाल पर उन्होंने चुप्पी साध ली। वहीं ग्राम पंचायत अधिकारी कमलेश शाही का कहना कि जल्द ही अधूरे पड़े शौचालयों के निर्माण के काम पूरे करा लिए जाएंगे। स्वच्छता अभियान के दौरान लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।