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Maharajganj News: डीजे के शोर से बढ़ गए अनिद्रा व तनाव के रोगी

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आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए ध्वनि
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मेडिकल कॉलेज में बढ़ गई अनिद्रा-तनाव के मरीजों की संख्या
महराजगंज। सहालग का समय शुरू होते ही डीजे का शोर बढ़ गया है। डीजे की तेज आवाज के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गई है। सहालग के कारण जाम की समस्या भी बढ़ गई है। रविवार रात में सक्सेना चौराहे से जिला उद्योग तिराहे तक आने में राहगीरों को आधे घंटे का समय लग गया। जाम में फंसी डीजे गाड़ियों की तेज आवाज से लोगों को काफी परेशानी हुई। यह समस्या महज एक दिन की नहीं बल्कि पिछले कुछ दिनों की है। डीजे की तेज आवाज के कारण अनिद्रा व तनाव के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सोमवार को अनिद्रा के साथ तनाव की समस्या से पीड़ित लोग अस्पताल पहुंचे।
सहालग तेज होने के कारण रविवार को सड़क पर डीजे गाड़ियों की संख्या भी अधिक रही। रविवार को रात आठ बजे के बाद से ही शहर की सड़कों पर डीजे गाड़ियों की कानफोड़ू आवाज से लोग परेशान दिखे। भीषड़ जाम और डीजे की तेज आवाज के कारण राहगीरों को सक्सेना चौक से जिला उद्योग तिराहे तक पहुंचने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। आसपास के घरों के लोग भी देर रात तक परेशान रहे। सामाजिक कार्यक्रम होने के कारण तकलीफ होने के बाद भी किसी ने विरोध नहीं किया। फरेंदा रोड पर कार से आ रहे रत्नेश तिवारी भारतीय स्टेट बैंक के पास किनारे रुक गए। एक साथ कई बरात सड़क से गुजरी तो सड़क पर जाम लग गया। वह कार किनारे करके सर्विस लेन में चले गए। उन्होंने बताया कि भीड़ थोड़ी कम हो जाए तो आगे बढूं। वह भी किसी बरात में शामिल होने आए थे। उन्होंने बताया कि डीजे का शोर ठीक तो नहीं है लेकिन किसको समझाया जाए। यह बात तो सबको समझनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कान सुन्न हो गया है।
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थोड़ा आगे बढ़ने पर फरेंदा जा रहे जितेंद्र कसौधन मिले। उन्होंने बताया कि भैया डीजे की आवाज इतनी तेज है की कार के अंदर भी बचैनी सी लग रही है। इतनी तेज आवाज में डीजे बजाया जा रहा है कि घबराहट हो रही है। एक अन्य राहगीर चंद्र देव वर्मा ने बताया कि सक्सेना चौक से जिला उद्योग तक जाने में आधे घंटे का समय लग गया। बिना जाम के यह दूरी त करने में मुश्किल से 10 मिनट लगता है। कुछ लोग भीड़ को किनारे करके जाम खुलवाने की कोशिश में जुटे रहे।
अनिद्रा के 30-40 मरीज पहुंचे मेडिकल कॉलेज
सोमवार को केएमसी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में अनिद्रा व तनाव की समस्या से पीड़ित मरीज अधिक संख्या में पहुंचे। करीब 30 से 40 मरीज इस समस्या से परेशान थे। यह सभी मरीज डीजे की तेज आवाज से परेशान होकर अस्पताल पहुंचे थे। आजाद नगर के धीरेंद्र कुमार ने बताया कि दो दिन से रात में ठीक से नींद नहीं आ रही है। डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद पता चला की बरात में डीजे के तेज आवाज के बीच ज्यादा देर तक रहने से यह समस्या हुई है। मुजहना के राकेश भी रविवार को बरात में शामिल होने कोल्हुई गए थे। उन्होंने बताया कि बरात से आने के बाद घबराहट से हो रही है। तनाव बढ़ गया। डॉक्टर ने परामर्श देने के बाद कुछ जाचें लिखी हैं।
केमएसी मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. जिशान ने बताया कि आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल से अधिक ध्वनि नहीं होनी चाहिए। बावजूद इसके डीजे संचालक औसत साउंड स्तर 90 से 160 डेसिबल तक पहुंचा रहे हैं। इससे स्वस्थ व्यक्ति को भी इससे परेशानी हो रही है।
हार्मोन तेजी से बदलने से दिल की गति (धड़कन) अनियंत्रित हो जाती
केएमसी मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मल्ल ने बताया कि तेज आवाज में डीजे बजने से न सिर्फ बुजुर्ग व मानसिक रोगी परेशान होते हैं बल्कि हृदय रोगियों के लिए यह जानलेवा हो सकता है। डीजे की तेज आवाज के दौरान संगीत (ड्रम) की धुन परेशान करने वाली होती है। इससे मनोरोगियों को नींद नहीं आती उनकी बेचैनी, परेशानी, तनाव आदि बढ़ जाता है। बुजुर्ग और हृदय रोगियों में हार्मोन तेजी से बदलने से दिल की गति (धड़कन) अनियंत्रित हो जाती है। जब नींद नहीं आती है तो घबराहट, बेचैनी आदि की दिक्कत होने लगती है। ट्रोपोनिन हार्मोन की वजह से हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
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जलन या अंधेपन की समस्या हो सकती
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष ने बताया कि तेज आवाज के साथ डीजे वाले रंग-बिरंगी चमक के साथ लेजर लाइट भी चमका रहे हैं। इससे आंखों को नुकसान हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि लेजर लाइट की किरणें आंखों की पुतली पर एक छोटे और तीव्र बिंदु पर केंद्रित होती हैं, इससे जलन या अंधेपन की समस्या हो सकती है।
कितनी ध्वनी से किस तरह का नुकसान
60-70 डेसीबेल - सामान्य बातचीत, कोई नुकसान नहीं

80-90 डेसीबेल - सड़क का शोर, लंबे समय में नुकसान शुरू
100-120 डेसीबेल - डीजे का सामान्य स्तर, कान का पर्दा दर्द करने लगता है
130-150 डेसीबेल - डीजे वाइब्रेशन मोड, तत्काल नुकसान, दिल की धड़कन तेज होने लगती है
160 डेसीबेल - कान का पर्दा फटने का खतरा
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