महराजगंज। कांवड़ यात्रा में डीजे का शोर आम लोगों को बेचैन कर रहा है। हृदय की धड़कन बढ़ने के साथ कान सुन्न हो जा रहा है। जिस रास्ते से डीजे का शोर होते काफिला गुजर रहा है। आसपास के लोग चंद घंटे परेशान हो जा रहे हैं।
सोमवार को जिले में कई स्थानों पर डीजे के शोर के बीच थिरकते हुए लोग जलाभिषेक के लिए रवाना हुए। शहर में मऊपाकड़ में डीजे की तेज धुन पर थिरकते हुए लोग शहर की सड़कों से गुजरे तो आसपास के लोगों के हृदय की धड़कन बढ़ गई थी। भक्ति गीतों की तेज आवाज से कुछ देर के लिए कान सुन्न हो गया। बाइक से आ रहे राजकिशोर कुछ देर किनारे खड़े हो गए।
श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने के बाद वह रवाना हुए। इस बीच उन्होंने कहा कि अब तो तेज आवाज में डीजे बजाना फैशन हो गया है। आस्था की बात होने के कारण कोई विरोध नहीं करता है, लेकिन इस दिशा में स्वयं ही लोगों को जागरूक होना पड़ेगा। डीजे तेज बजते हुए आगे बढ़ा तो उत्साहित युवक थिरकते हुए जयघोष कर रहे थे।
आसपास के दुकानों पर बैठे लोग भी थोड़ी देर के लिए असहज हो गए। इसी तरह से बागापार में कांवड़ यात्रा में शामिल चंदन कुमार ने बताया कि तेज आवाज से गला सुखने लगा था। भ्रमण के दौरान दो बार पानी पीना पड़ा था। सावन में कांवड़ यात्रा विशेषकर सोमवार के दिन ही निकलती है। डीजे की धुन पर थिरकते हुए युवा सेहत को होने वाले नुकसान से अनजान हैं।
इसके अलावा जिले में अन्य स्थानों पर डीजे के तेज आवाज के साथ कांवड यात्रा निकली। डॉक्टरों के अनुसार, डीजे की तेज आवाज बीमार लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। कमजोर दिल वाले ह्रदय रोगियों के लिए डीजे की तेज आवाज जानलेवा साबित हो सकती है। डीजे की तेज आवाज पर प्रतिबंध के बाद भी इस पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है।
डीजे से 120 से 130 डेसीबल तक शोर पैदा होता है जो खतरनाक ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आता है। इस दौरान ध्वनि में कंपन बढ़ जाती है। यही कंपन हृदय रोगियों के लिए जानलेवा होता है। सबसे खतरनाक तो तब हो जाता है जब डीजे की धुन पर नाचने वाले घंटों एक ही जगह पर खड़े होकर मनोरंजन करते हैं। कांवड़ यात्रा में डीजे बजाना फैशन हो गया है। समय के साथ इसमें भी बदलाव हो गया है।
बड़े-बड़े साउंड बाक्स के जरिए बजने वाले गानों की धुन भी कुछ अलग अंदाज की होती है। डीजे की तेज आवाज ऐसी होती है कि घरों की दीवारें, दीवारों पर टंगे बर्तन और जमीन में कंपन सा महसूस होता है। खोन्हौली गांव के 60 वर्षीय कमलेश प्रजापति ने बताया कि हृदय रोग की दवा चलती है। इन दिनों डीजे के शोर से परेशानी होती है। बीते दिन इटहिया गया था तो वहां डीजे का शोर कुछ सुना तो बेचैनी हो गई। घबराहट के कारण वहां से घर चला आया।