गले में खराश, कान और नाक के मरीजों में हुआ इजाफा
जिला अस्पताल में इन दिनों पहुंच रहे औसतन 50 मरीज
महराजगंज। कुछ दिनों से हो रही बारिश की वजह से कई बीमारियां अपना पांव पसारने लगी हैं। नतीजतन जिला अस्पताल में इस समय नाक, कान, गला के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। बुधवार को जिला अस्पताल में करीब 50 से 60 मरीज पहुंचे। एक सप्ताह पहले ऐसे मरीजों की संख्या 30 से 40 थी। डॉक्टर ने जांच कर दवा देकर सतर्कता बरतने की सलाह दी।
सरकारी और निजी अस्पतालों के ईएनटी विभागों में मरीजों की आम दिनों की तुलना में भारी बढ़ोतरी हुई है। अधिकांश मरीजों में बीमारी की शुरुआत गले में खुजली, चुभन, दर्द और खाना निगलने में तकलीफ से हो रही है। दो से तीन दिन तक गला खराब रहने के बाद मरीजों को तेज वायरल बुखार और बदन दर्द अपनी चपेट में ले रहा है।
वहीं कान में फंगल इन्फेक्शन के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका दीक्षित ने बताया कि मौसम में तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है। इसके चलते अत्यधिक गर्मी, उमस या ठंड के दौरान बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं। हवा में मौजूद धूल-धुआं और एलर्जी पैदा करने वाले कण (एलर्जेंस) नाक और गले की झिल्ली को प्रभावित करते हैं।
वहीं बारिश के चलते कान में फफूद लगने की भी समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए नहीं तो दिक्कत और बढ़ जाएगी। उन्होंने बताया कि कान में तेज दर्द, भारीपन या हवा जैसा भरा महसूस होना। कान से पानी या मवाद आना। कम सुनाई देना या कान में खुजली होना। कान की बीमारी के शुरुआती लक्षण होते हैं।
डॉ. प्रियंका दीक्षित ने बताया कि अत्यधिक ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स या आइसक्रीम का सेवन गले में संक्रमण (इंफेक्शन) का कारण बनता है। शुरुआती सर्दी-जुकाम को नजरअंदाज करने से यह साइनस या कान के इन्फेक्शन में बदल जाता है। इसके चलते काफी दिक्कत होती है।
कान में दिक्कत होने पर ये बरतें सावधानी
कान में खुजली होने पर माचिस की तीली, बड्स या कोई नुकीली चीज डालने से बचें, इससे फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है। कान की समस्या होने पर डॉक्टर को दिखाएं। कान में तेल न डालें। बिना डॉक्टर की सलाह की कोई भी दवा न लें। नहीं तो यह परेशानी और बढ़ सकती है।