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Maharajganj News: एक साथ जलीं तीन युवकों की चिताएं, छलक पड़े आंसू

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मृतक भीम व सुरेश की चिता को मुखाग्नि देते पिता विजन प्रसाद। संवाद - फोटो : MAHARAJGANJ
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एक साथ जलीं तीन युवकों की चिताएं, छलक पड़े आंसू
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परतावल। शुक्रवार की रात सड़क हादसे में मारे गए गांव के तीन बेटों का अंतिम संस्कार शनिवार की शाम चार बजे लक्ष्मीपुर भरगावा गांव के दक्षिण स्थित श्मशान घाट पर किया गया। सगे भाई सुरेश व भीम के शव को पिता विजन प्रसाद ने तथा राकेश के शव को उनके पिता नंदलाल प्रसाद ने मुखाग्नि दी। दोनों की डबडबाई आंखें देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखों से आंसू छलक पड़े।
दुर्घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। गांव के ग्रामीणों को सुबह से ही शव के आने का इंतजार था, जिससे कि आने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जा सके। ग्रामीणों ने शव के अंतिम संस्कार के लिए गांव के दक्षिण स्थित श्मशान घाट पर दो चिताएं सजा रखी थीं। शाम चार बजे एंबुलेंस से उनका शव सीधे श्मशान घाट पहुंचा। एक चिता पर दो सगे भाइयों व दूसरे पर राकेश के शव को रखा गया।
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गरीबी का दंश झेल रहे परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
परतावल। लक्ष्मीपुर भरगांवा में दिल दहलाने वाली घटना से दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। युवकों के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। शनिवार को गांव में मातम का माहौल रहा। गांव के लोग ग्रामीण भी मृतकों के परिवार के सदस्यों को समझाने-बुझाने में जुटे रहे।
गांव के बिजान व नंदलाल के हंसते-खेलते परिवार पर शुक्रवार वज्रपात हो गया। सुरेश व भीम (दिवंगत) की मां फूलमति बार-बार अपने बच्चों को बुलाती रहीं। उन्हें क्या पता था कि अब उनके लाल कभी वापस नहीं आएंगे। यही हाल राकेश के परिवार का भी रहा। परिवार के सदस्य राकेश का नाम लेकर दहाड़े मारकर रो रहे थे। ग्रामीण दोनों परिवारों को ढांढस बंधा रहे थे।
खुशी लेकर आई बाइक बनी गम का कारण
नंदलाल के बड़े पुत्र संजय की शादी दो महीने पहले हुई थी। उसी में बाइक मिली थी। शादी के बाद परिवार की माली हालत सुधारने के लिए संजय विदेश चला गया। शुक्रवार को राकेश के साथ बाइक पर सवार होकर सुरेश और भीम नगर पंचायत परतावल के छातीराम में बहन मीरा के घर खिचड़ी पहुंचाने गए थे। नंदलाल को क्या पता था कि घर में खुशी लेकर आई नई बाइक उनके परिवार के लिए गम का कारण बन जाएगी।
मजदूरी से ही भर रहा परिवार का पेट
सुरेश व भीम के पिता बिजान 65 साल की उम्र में भी मजदूरी करके परिवार का पेट पालते हैं। खेती के लिए जमीन नहीं है। चार बेटों के पिता बिजान ने चारों बेटियों गीता, मीरा, रूना, सरीता की शादी कर दी है। बड़े बेटे सुरेंद्र की शादी भी हो चुकी है। सुरेंद्र सिलाई का काम करता है। तीन बेटे राजेश, सुरेश व भीम भी छोटे-मोटे काम करते थे। शुक्रवार को वह बहन मीरा के घर खिचड़ी लेकर गए थे और आते समय यह हादसा हो गया। नंदलाल भी भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। राकेश भी पढ़ाई-लिखाई छोड़कर पेंटिंग के काम से जुड़ा था। सबसे छोटा शैलेश भी मजदूरी करता है। हादसे के बाद तीन भाइयों के बीच एक बहन बबिता का रो-रो कर बुरा हाल है।
डिवाइडर न होने से हुई दुर्घटना
सेमरा चंद्रौली व छातीराम पेट्रोल पंप के बीच का स्थल दुर्घटना बहुल क्षेत्र के रूप में चिह्नित है। एनएच-730 पर स्थित इस सड़क में डिवाइडर का न होना हादसे का कारण बन रहा है। प्रत्येक वर्ष औसतन 20 से 25 दुर्घटनाएं यहां हो रही हैं। सेमरा चंद्रौली के प्रधान सचिन सिंह का कहना है कि बार-बार दुर्घटना के बाद भी इस स्थल पर बचाव की दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है।
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विधायक व अधिकारियों ने बंधाया ढांढस
शनिवार की सुबह क्षेत्रीय विधायक ज्ञानेंद्र सिंह, काशीनाथ सिंह व निर्भय सिंह ने परिवार के लोगों को ढांढस बंधाया। उप जिलाधिकारी मोहम्मद जसीम व पुलिस उपाधीक्षक अजय सिंह चौहान ने भी परिजनों को सांत्वना दी।
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