महराजगंज। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की गई। शुक्रवार को शिक्षकों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
जिलाध्यक्ष बलराम निगम ने कहा कि नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009 की धारा-23 में स्पष्ट प्रावधान है कि केंद्र सरकार 25 अगस्त 2010 के बाद प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति के लिए न्यूनतम अर्हता के साथ टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य करेगी। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश सरकार ने 11 जुलाई 2011 को इसे लागू कर टीईटी को अनिवार्य बना दिया।
हालांकि, भारत सरकार के राजपत्र संख्या-34, दिनांक 10 अगस्त 2017 के अनुसार, 31 मार्च 2015 को या उसके बाद नियुक्त शिक्षकों को चार वर्ष के भीतर न्यूनतम अर्हता (टीईटी) अर्जित करनी होगी।
अधिनियम 2009 एवं 2017 के संशोधन से स्पष्ट है कि यह प्रावधान उन शिक्षकों पर लागू होता है, जो 25 अगस्त 2010 के पश्चात केंद्रीय सेवा में शिथिलता प्राप्त कर नियुक्त हुए। उत्तर प्रदेश में शिक्षा अधिकार अधिनियम 29 जुलाई 2011 को लागू हुआ, इसलिए 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य नहीं है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय मिश्र ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के एक सितंबर 2025 के निर्णय से शिक्षकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे वे चिंतित और आक्रोशित हैं। संगठन को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ सकता है।