महराजगंज/चौक बाजार। वन क्षेत्र में रामग्राम टीले पर पुरातत्व विभाग की टीम खोदाई कर रही है। शुक्रवार को प्राचीन काल के सांचे में ढाले गए ईंटों के साथ अलंकारित दीवार मिली है। वहीं खोदाई में मिले सामान, ईंट, टूटे बर्तन पर मिली कलाकृतियों को जोड़ कर एक चित्रकला बनाकर देखा गया। उम्मीद है कि सभी तथ्यों के अवलोकन के बाद रामग्राम को पहचान जरूर मिलेगी।
जानकारी के अनुसार, भारतीय पुरातत्वविद की टीम ने ट्रेंच लेआउट से टीले को चार ब्लॉक में बांटकर खोदाई कर रहा है। अब तक दो ब्लाॅक की खोदाई में अलंकृत दीवार मिला है। शुक्रवार को चौथे ब्लॉक की खोदाई में भी अलंकृत दीवार मिली, जिससे रामग्राम होने की उम्मीद बढ़ती जा रही है। अब तक की खोदाई में प्राचीन काल के सांचे में ढाले गए ईंट के साथ अलंकारित दीवार मिली है। इसे लेकर पुरातत्व विभाग की टीम सहित क्षेत्रीय लोगों में रामग्राम की उम्मीद जगी है।
नाथनगर बीट के जंगल में कन्हैया बाबा स्थान पर भगवान बुद्ध के आठवें अस्थि कलश होने बात कही जाती है। इसकी प्रमाणिकता के लिए खोदाई हो रही है। चार ब्लॉक की खोदाई में विशेष तरह की प्राचीन दुर्लभ अलंकृत दीवार मिला है। खोदाई के दौरान विशेष प्रकार की ईंट भी मिली है।
पुरातत्वविद डाॅ. आफताब हुसैन ने बताया कि अभी तक टीले के पश्चिम तरफ चार ब्लॉक में विशेष औजारों से खोदाई की जा रही है। खोदाई में मिले ईंट व अन्य वस्तुओं को संरक्षित कर उस पर गहन अध्ययन किया जा रहा है। अध्ययन के बाद ही इसकी प्रमाणिक जानकारी दी जा सकती है। उत्खनन में बीते रविवार को मिट्टी के टूटे बर्तन, कलात्मक ईंट की संरचना मिली थी।
पुरातत्व विभाग के टीम के सदस्य राकेश चौधरी ने बताया कि टूटे हुए मृद भांड व प्राचीन ईंट पर बने नक्काशी का चित्रण करके देखा गया। खोदाई में मिले सामान, ईंट और टूटे बर्तनों पर मिली कलाकृतियों को जोड़कर एक चित्रकला बनते हुए देखा गया, जिनमें भगवान बुद्ध का चित्रण किया गया है।ा