बाजार में इस वक्त जीरा 900 रुपये से लेकर 1000 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जीरा का रेट इन दिनों 900 पार हो गया है। जीरा महंगा होने का प्रमुख कारण व्यापारी यह मान रहे हैं कि इसकी सप्लाई चीन में ज्यादा हो रही है। इस वजह से यहां जीरा महंगा हो गया है। दाल में तड़का लगाना हो, चावल फ्राई करना हो या कोई सब्जी बनानी हो, चूल्हे पर चढ़े बर्तन में तेल के बाद सबसे पहले जीरा ही डाला जाता है। महराजगंज शहर के बाजार में इन दिनों जीरा 900 से लेकर 1000 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। ऐसे में कई परिवारों की रसोई से जीरा गायब हो गया है। एक तरह से कहें तो भारतीय भोजन की जान है जीरा, लेकिन पिछले कुछ महीने से जीरा की कीमत आसमान पर चढ़ी हुई है।
कारोबारी जनार्दन ने बताया कि किसी को यह समझ नहीं आ रहा है कि आखिर अचानक जीरे का भाव इतना क्यों बढ़ गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या अब कभी इसकी कीमत कम होगी। इसमें जीरा का भाव बढ़ने के देशी और विदेशी दो तरह के कारण निकलकर सामने आए हैं। जीरा की कीमत बढ़ने के प्रमुख कारणों में चीन भी शामिल है।
कारोबारी सूत्रों के अनुसार इस वर्ष जनवरी फरवरी से चीन में जीरा की मांग अत्यधिक बढ़ गई है। वहीं, मार्च अप्रैल में बांग्लादेश सहित अन्य मुस्लिम देशों से भी जीरे की मांग बढ़ गई थी। बताया जा रहा है कि इस वक्त प्रतिदिन 29 से 30 कंटेनर जीरा चीन भेजा जा रहा है। वहीं, एक माह पहले तक मुस्लिम देशों को भी सप्लाई बढ़ गई थी।
-
इन कारणों से बढ़ा है जीरे का भाव
किराना कारोबारी अशोक टिबड़ेवाल कहते हैं कि भारत में जीरे की कीमत बढ़ने के कुछ स्थानीय और कुछ अंतरराष्ट्रीय कारण हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण विदेश से बढ़ी मांग है। वहीं, जीरा उत्पादक दूसरे देशों में पिछले सीजन में उत्पादन कम हुआ था। सीरिया और अफगानिस्तान में भी जीरे की खेती होती है। दूसरे देश में जीरे की खेती का रकबा कम होना, तीसरा मौसम और चौथा मुनाफाखोरी शामिल है।
-
बढ़ी मांग के कारण मुनाफाखोर भी सक्रिय हो गए
जीरा की विदेश में बढ़ी मांग के कारण मुनाफाखोर भी सक्रिय हो गए हैं। इस कारण भारतीय बाजारों में मांग की तुलना में पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है। व्यापारियों के अनुसार बड़े किसान ने भी जीरा की आपूर्ति रोक रखी है। इसकी वजह से भी बाजार प्रभावित हो रहा है।
जीरा का रकबा घटा, पड़ी मौसम की मार
कृषि विशेषज्ञ अर्जुन कुमार ने बताया कि देश में जीरा की खेती मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान में होती है, लेकिन दोनों ही राज्यों में पिछले कुछ वर्षों में जीरे की खेती का रकबा कम हुआ है। इन राज्यों में पिछले एक दशक में जीरे की खेती के रकबे में करीब चार लाख हेक्टेयर से अधिक की कमी आई है। इधर, मौजूदा खेती पर मौसम की भर पड़ी है। समद्री चक्रवात और ओलावृष्टि से जीरा की फसल प्रभावित हुई है।
कीमतों में गिरावट का दौर जल्द ही शुरू हो जाएगा
अर्थशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर आशुतोष उपाध्याय ने बताया कि भारतीय बाजारों में अब जीरा की कीमतों में गिरावट का दौर जल्द ही शुरू हो जाएगा। चीन सहित अन्य विदेशी राज्यों से अब मांग घटने लगी है। इस बीच जीरा की नई फसल बाजार में आनी शुरू हो गई है। सीरिया और अफगानिस्तान में इस वर्ष जीरा की अच्छी पैदावार हुई है। वहां का जीरा भी बाजार में आने लगा है। इन सभी कारणों से उम्मीद की जा रही है कि जुलाई में जीरा की कीमतें धीरे-धीरे कम होने लगेगी।
-
रेट के अंतर होने के कारण सीमावर्ती क्षेत्र से हो रही तस्करी
नेपाल से काली मिर्च, दालचीनी, बड़ी इलायची, छोटी इलायची, लौंग, पोस्तादाना, जावित्री और भारत से जीरा, धनिया और कबाबचीनी जैसे मसाले भेजे जा रहे हैं, जिसमे कुछ मसालों पर दोगुना का अंतर है। जिससे तस्करी का यह कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। वजह यह है कि कीमत नेपाल में काली र्मिच की 600 तो भारत में 850, दालचीनी नेपाल में 300 तो भारत में 800, बड़ी इलायची नेपाल में 700 भारत में 1000 , लौंग नेपाल में 1000 तो भारत में 1200, छोटी इलायची नेपाल में 1200 तो भारत में 2000, जावित्री नेपाल में 2000 तो भारत में 2400 से बिक रही है। इसी तरह से अन्य रेट भी हैं। ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में तस्कर इसका लाभ उठा रहे हैं।