महराजगंज/रतनपुर। पहाड़ी नाला बघेला उफनाने से परसामलिक क्षेत्र के कई गांवों में अफरातफरी मची हुई है। लोगों की मुश्किलें लगातार दूसरे दिन भी जस की तस हैं। प्रभावित लोगों ने प्रशासन पर बाढ़ से बचाव में नाकामी का आरोप लगाया है।
शुक्रवार शाम से उफनाया बघेला शनिवार को भी क्षेत्र में रौद्र रूप अख्तियार किए रहा। परसामलिक क्षेत्र के रेहरा, अहिरौली, शिवपुरी, सेवतरी, सेखुवानी, करौता, गंगवलियां, भरटोलियां, श्रीरामपुर गांव की बस्तियों में पानी पहुंच गया है। शनिवार को नौतनवां थाना के गांव चकदह के बेलहिया, बेलभार, महुलैना, घरोहिया, आजादनगर, मनिकापुर परसहवा तथा मरचहवा टोले पर कई घरों में पानी घुस गया है। सिवान में बाढ़ से मवेशियों को चारे का संकट पैदा हो गया है।
शुक्रवार को रोहिन नदी में बाढ़ से चकदह के मरचहवा, घटवा, लालपुर, नौडिहवा, मगरभौली के लोग अभी उबरे नहीं थे कि बघेला ने तांडव शुरू कर दिया। बाढ़ का पानी लुठहवां, महरी, घोड़हवां आदि गांवों की धान की फसल को डुबोते हुए तरैनी, बभनी, कुकेसर गांव की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। गांवों के नजदीक बाढ़ का पानी जमा होने से लोगों को अब संक्रामक बीमारियों का खतरा सताने लगा है ।
बरगदवा प्रतिनिधि के अनुसार, शनिवार की दोपहर दो बजे मंडलायुक्त पी गुरुप्रसाद, जिलाधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह, डीआईजी शिव सागर सिंह व एसपी भारत सिंह यादव ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। मंडलायुक्त ने बरगदवा थानाध्यक्ष हरी सिंह यादव से बाढ़ प्रभावित इलाकों के बारे में जानकारी ली। ग्रामीणों को बाढ़ से बचाने का निर्देश दिया। उन्होंने थानाध्यक्ष को बाढ़ प्रभावित इलाके का निरंतर दौरा करने के लिए भी कहा।
झुलनीपुर प्रतिनिधि के अनुसार,। नेपाल के नवलपरासी जिले से होकर बहने वाली नारायणी नदी में शनिवार को अचानक जल स्तर बढ़ने से नेपाल स्थित ए और बी गैप के साथ ही नेपाल बांध पर खतरा मंडराने लगा है। बी गैप बांध के 13 नंबर ठोकर का एप्रन बह गया और नोज क्षतिग्रस्त हो गया।
नारायणी में सुबह करीब 7 बजे 3.072 लाख क्यूसेक पानी का फ्लो हो गया। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार ठोकर के नोज को बचाने के लिए 7 मीटर स्लेव व करीब 15 मीटर एप्रन का पक्का निर्माण किया गया था। वह पानी का दबाव झेल नहीं पाया। इस संबंध में जेई मोहम्मद शरीफ ने बताया कि ठोकर को किसी भी प्रकार की क्षति नहीं होने दी जाएगी। क्षतिग्रस्त नोज को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।नारायणी नदी के त्रिवेणी पुल के संचालन में लगी निजी कंपनी की लापरवाही सें शुक्रवार की रात पुल का 33 नंबर गेट (फाटक) टेढ़ा होकर फंस गया। सरकारी कर्मियों की तत्परता से पुल बचा लिया गया और हादसा होने से बच गया।
नेपाल से होकर महराजगंज जिले को छूकर बिहार जाने वाली नारायणी नदी में अचानक जल स्तर बढ़ गया। कंप्यूटरीकृत सिस्टम फेल हो जाने के कारण बैराज के गेट नहीं उठ सके। कर्मचारी जब तक मैनुअल तरीके से फाटक उठाने का प्रयास करते, तब तक बैराज का 33 नंबर (गेट) फाटक मुड़ गया। इस पुल का निर्माण वर्ष 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल ने कराया था। 2012-13 में बिहार सरकार ने इसकी मरम्मत कराई थी। बिहार सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता अरुण कुमार ने बताया कि निजी कंपनी के सिस्टम फेल होने से बड़ी घटना हो सकती थी। परंतु सिंचाई कर्मियों की तत्परता से पुल को बचाया जा सका। जल्द ही फाटक लगा दिया जाएगा।