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फूड प्वाइजनिंग से दस मजदूर बीमार

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फरेंदा। गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में लगे एक दर्जन मजदूर रविवार को फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए। उल्टी-दस्त की शिकायत बढ़ने लगी तो स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस बुलाकर सभी बीमार मजदूरों को सीएचसी बनकटी पहुंचाया। मजदूरों का इलाज चल रहा है। पश्चिम बंगाल के माल्दा जिला के हातिमअली गांव निवासी कई मजदूर राजमार्ग निर्माण करने वाली कंपनी पीएनसी में मजदूरी का कार्य करते हैं। सभी मजदूरों का खाना एक साथ बनाया जाता है। वह रोज की भांति शनिवार की रात में चावल, दाल व आलू का चोखा खाकर सो गए थे। सुबह नाश्ता में छोला खाए। थोड़ी देर के बाद एकाएक सभी मजदूरों की तबीयत खराब होने लगी। बीमार मजदूरों में मोतीलाल (55), बसंती (52), देवाशीष (24), सुनीता (22), प्रसन्नजीत (23), अर्चना (18), मनिक (19), सबजुल (50), रंजीत उर्फ दीप (18) व संध्या (24) गंभीर रूप से बीमार हो गए। सभी लोगों को उल्टी दस्त तथा चक्कर आने लगा। साथ के लोगों ने घटना की सूचना 108 एंबुलेंस को दी। एंबुलेंस से सभी बीमार मजदूरों को सीएचसी बनकटी ले जाया गया। जहां पर सभी मजदूरों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। चिकित्सक डॉ एसपी वर्मा ने बताया कि मजदूर फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुए हैं। इलाज किया जा रहा है लेकिन, अभी भी खतरा बना हुआ है। इलाज में देरी होती तो बड़ी घटना हो सकती थी।
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बरसात के दिनो में फूड प्वाइजनिंग का खतरा अधिक
डॉ एसपी वर्मा ने बताया कि बरसात के दिनों में घर के अगल-बगल गंदा पानी जमा होने पर संक्रामक बीमारी का खतरा बना रहता है। साथ बरसात के दिनो में भयंकर गर्मी व उमस के कारण बासी खाना खाने से परहेज करें। बासी खाना प्वाइजन भी बन जाता है। इससे तबीयत खराब हो सकती है।
कंपनी परिसर में जमा है बरसात का पानी
पीएनसी कंपनी के परिसर में बरसात का पानी भरा हुआ है। कंपनी में सैकड़ों की संख्या में मजदूर व कर्मचारी काम करते हैं। जलनिकासी की व्यवस्था न होने से बीमारी की आशंका बनी हुई है।
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