निचलौल। डीएम की अध्यक्षता में आयोजित तहसील दिवस में अनुपस्थित 11 कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया। पिछले तहसील दिवस के अवशेष शिकायतों का तीन दिन में निस्तारण कर रिपोर्ट देने को कहा। इस दौरान 173 मामले आए, जिनमें महज 5 मामले निस्तारित हुए।
इस दौरान सीएमओ, एसी वाणिज्यकर, जिला मनोरंजन अधिकारी, जिला उद्योग अधिकारी, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी, जिला होम्योपैथिक अधिकारी, प्रबंधक दूर संचार, भूमि संरक्षण अधिकारी भूमि विकास, भूमि संरक्षण अधिकारी कृषि सहित 11 अधिकारी अनुपस्थित रहे। डीएम ने अनुपस्थित अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटने का निर्देश देने के साथ ही स्पष्टीकरण तलब किया है।
पिछले तहसील दिवस की बाकी शिकायतों को तीन दिन मे निस्तारित कर रिपोर्ट मांगा। इस दौरान आए 173 मामलों में महज 5 शिकायतों का निस्तारण हो सका। बढ़या मुस्तकील की सलेकुन ने कोटेदार पर राशन न देने का आरोप लगाया। मधुबनी की दुर्गवासी ने बैनामाशुदा भूमि की पैमाइश कराने की मांग की। पड़री के अजय, राहुल, कृण्णमोहन ने श्मशान तथा मरघट की जमीन पर अवैध अतिक्रमण की शिकायत की। बढ़या की तारा देवी व मैना देवी ने पंचायतमित्र पर आवास के नाम पर धन उगाही का आरोप लगाया। इस दौरान एएसपी, उपजिलाधिकारी ज्ञानेश्वर प्रसाद, तहसीलदार केशव प्रसाद, सीओ सुरेंद्र तिवारी आदि उपस्थित रहे।
लोहिया आवास के धन में गबन का आरोप ः नौतनवां। खैराटी निवासी कई ग्रामीणों ने मंगलवार को तहसील दिवस में एसडीएम आलोक कुमार को शिकायती पत्र सौंपकर ग्राम प्रधान द्वारा लोहिया आवास के प्रथम किस्त में गबन करने का आरोप लगाकर मामले की जांच व ग्राम प्रधान पर कार्रवाई की मांग की है। खैराटी निवासी इस्माइल, रामप्रीत, बाबूलाल व गयासुद्दीन ने एसडीएम को सौंपे शिकायती पत्र में कहा है कि उन लोगों का 2016-17 में लोहिया आवास का चयन हुआ था।
इसमें प्रथम किस्त के रूप में एक लाख सैंतीस हजार पांच सौ रुपये स्वीकृत हुए। ग्राम प्रधान पर रकम निकालने का आरोप है। इसकी सूचना थाने पर भी की गई। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की किसी सक्षम अधिकारी से जांच कराकर ग्राम प्रधान के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बर्तन की मिट्टी उपलब्ध कराने की मांगः नौतनवां। कुम्हारों ने एसडीएम आलोक कुमार को ज्ञापन सौंपकर मिट्टी खनन की अनुमति देने की मांग की। एसडीएम ने जल्द ही समस्या के निस्तारण का आश्वासन दिया है। नौतनवां कस्बा और आसपास के क्षेत्रों में अब भी दर्जनों कुम्हार परिवार ऐसे हैं। जो परंपरागत पेशानुसार मिट्टी के बर्तन बना अपना जीवन यापन करते हैं।
कुम्हार जिस तरह की मिट्टी प्रयुक्त करते हैं वह जमीन के कुछ फुट नीचे या ताल-तलैयों में होती है। मिट्टी खनन पर रोक लगाए जाने के फरमान से कुम्हारों को मिट्टी नहीं मिल पा रही है। इससे उनका पुश्तैनी धंधा प्रभावित हो गया है। वासुदेव, भुलाई, लल्लन, राममिलन, बद्री, रामप्रसाद, श्यामसुंदर, वासुदेव, रामप्रसाद रामजतन सहित कुम्हारों ने पत्र में एक-दो ट्राली मिट्टी लाने की अनुमति देने, या उनके लिए मिट्टी उपलब्ध कराने की मांग की है।