कहीं ताल में खुले पशु आश्रय तो कहीं सुने पड़े केंद्र
महराजगंज। जिले के गांवों में मनरेगा से बने पशु आश्रय स्थल बदहाल हैं। पशुओं के चारे पानी के इंतजाम मुश्किल से किए जा रहे हैं। लाखों की लागत से बने गांवों में इन केंद्रों को लेकर अधिकारी भी गंभीर नहीं है। ऐसे आश्रय केंद्र बनाने में किस तरह लूटखसोट हुई है इसकी बानगी निचलौल क्षेत्र के मदनपुरा पशु आश्रय स्थल को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है।
रकम खपाने के लिए दबंगों ने आश्रय स्थल को ताल में बना दिया हैं, जहां अब एक भी पशु नहीं है। गांवों में बने पशु आश्रय स्थल का जायजा अमर उजाला टीम ने लिया तो बदहाली की कई तस्वीरें सामने आईं।
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पशु आश्रय स्थल, चेहरी, समय 9.04 बजे
सदर ब्लॉक के पशु आश्रय स्थल चेहरी 9.98 लाख की लागत से बना है। यहां 16 पशु हैं। इसकी देखभाल कर रहे गोविंद एवं नागेंद्र ने बताया कि भूसा पर्याप्त है। पांच किलो चोकर बचा है। परिसर में लाइट की कोई व्यवस्था नहीं थी। रात में पशुओं की रखवाली में परेशानी होती है। ग्राम पंचायत अधिकारी प्रेम सागर पटेल ने बताया कि व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
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बभनौली बुजुर्ग, समय 9.20 बजे
परतावल क्षेत्र के पशु आश्रय स्थल बभनौली बुजुर्ग दो लाख 35 हजार 761 की लागत से बना है। यहां कुल 16 पशु हैं। बाहर से गेट बंद था। कोई कर्मचारी मौकेे पर नहीं मिला। एक बीमार पशु नाद पर पड़ा हुआ था। अन्य पशु में परिसर में भूखे प्यास बैठे हुए थे। नाद में भूसा पड़ा हुआ था। लेकिन पानी नहीं था। हरा चारा यहां भी नहीं दिखा।
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आश्रय स्थल, औरहिया, समय 9.40 बजे
पनियरा क्षेत्र के ही आश्रय स्थल औरहियां की हालत भी बदहाल है। यहां मौके पर एक भी पशु नहीं दिखाई दिए। इस केंद्र को बनाने में करीब चार लाख रुपये की लागत आई है। यहां कोई कर्मचारी भी नहीं दिखा। देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि यहां कभी कोई पशु रखा ही नहीं गया है। आस पास बडी बडी खास फूस उगी हुई थी। पशु आश्रय स्थल के आस पास पानी लगा हुआ था।
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कुआंचाप, समय 9.55 बजे
पनियरा क्षेत्र के पशु आश्रय स्थल कुआंचाप में कोई मवेशी नहीं दिखा। तीन 3 लाख 96 हजार की लागत से बने इस स्थल को भी देखकर ऐसा लगा कि यहां कभी कोई मवेशी नहीं रखा गया। कोई कर्मचारी भी नहीं मिला। परिसर के आसपास जलभराव था। चहारदीवारी भी नहीं है। नाद में भूसा भी नहीं था। आसपास के लोगों ने बताया कि यहां कोई पशु रखा ही नहीं गया।
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मदनपुरा, समय, 10.20 बजे
निचलौल क्षेत्र के मदनपुरा पशु आश्रय स्थल करीब 12 लाख की लागत से बना है। तीन एकड़ 65 डिस्मिल में फैले इस स्थल में एक भी पशु नहीं रहते हैं। मजे की बात यह है कि केंद्र ताल में बनाया गया है। गेट पर ताला जड़ा हुआ था। कोई कर्मचारी भी नहीं मिला। लौटते वक्त रास्ते में गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि गो संरक्षण के नाम पर रकम का बंदरबांट हुआ है।
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जांच कर व्यवस्था में होगा सुधार : सीडीओ
सीडीओ पवन कुमार अग्रवाल ने बताया कि गांव में बने पशु आश्रय केंद्र की व्यवस्था को बेहतर करने के प्रयास जारी हैं। कहीं गड़बड़ी हैं, वहां जांच के बाद व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। पशुओं के चारे-पानी आदि की व्यवस्था को लेकर प्रशासन गंभीर है। लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।