महराजगंज। फरवरी में चढ़ाव उतार वाले तापमान ने गेहूं की फसल देखरेख पर किसानों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है, जिससे तापमान बढ़ने से पहले फसल का अपेक्षित विकास पूर्ण हो जाए। साथ ही बसंत कालीन गन्ने की बोआई और ग्रीष्मकालीन सब्जियों की खेती भी इसी माह पूर्ण कर लेने की जरूरत कृषि विभाग व्यक्त कर रहा है।
जनपद में 2.45 लाख हेक्टेयर गेहूं का इस वर्ष खेतों में है। खाद की किल्लत के कारण विलंब से बुआई फिर फरवरी में चढ़ते तापमान ने देखरेख की जिम्मेदारी खड़ी कर दी है। गेहूं की तीन सिंचाई की जरूरत होती है। दूसरी सिंचाई लगभग अधिकतर किसान कर चुके हैं।
उप कृषि निदेशक वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि तीसरी सिंचाई की जरूरत अबतक मार्च में पड़ती थी, लेकिन एकाएक बढ़े तापमान ने तीसरी सिंचाई की जरूरत फरवरी में ही पैदा कर दी है। आने वाला समय फसल की पुष्प अवस्था का है। इसे देखते हुए पौधों में भरपूर पोषण बनाए रखें जिससे पुष्प हल्के न पड़ने पाएं। मिट्टी की नमी को देख सिंचाई की जरूरत दिखे तो त्वरित करें क्योंकि आने वाले दिनों में तापमान बढ़ेगा उस समय सिंचाई विपरीत परिणाम दे सकता है।
बसंत कालीन गन्ने के लिए भी यह समय उपयुक्त है। नवीन व उन्नत किस्म की पेंड़ी का प्रयोग करें। लाल सड़न वाली पेंड़ी का उपयोग न करें। गन्ने की दो कतारों के बाद मूंग या मसूर प्रतिबद्ध तरीके से डाली जा सकती है। 15 फरवरी के बाद ग्रीष्मकालीन सब्जियों का समय बेहतर है। सब्जी वाले खेत नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश की मदद से तैयार कर लें। भिंडी, लोबिया, टमाटर, मिर्च 15 फरवरी के बाद करें। मौसम को देखते हुए टाइमिंग बदलाव की जरूरत है जिससे उत्पादन बेहतर हो सके।